Venezuela President Story: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का राजनीतिक सफर किसी असाधारण कहानी से कम नहीं है। एक समय बस चलाने वाले मादुरो आज दुनिया की सबसे विवादित राजनीतिक हस्तियों में गिने जाते हैं। ह्यूगो चावेज के उत्तराधिकारी के तौर पर सत्ता संभालने से लेकर अमेरिका के साथ सीधे टकराव और अंततः गिरफ्तारी तक, उनका जीवन संघर्ष, आरोपों और सत्ता की राजनीति से भरा रहा है।

Venezuela President Story: चावेज का भरोसा और सत्ता की विरासत
दिसंबर 2012 में कैंसर से जूझ रहे राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज ने देश को संबोधित करते हुए मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। चावेज ने खुले मंच से जनता से अपील की थी कि यदि वे सत्ता में न रह सकें, तो निकोलस मादुरो को ही देश की कमान सौंपी जाए। चावेज की मृत्यु के बाद 2013 में हुए चुनावों में मादुरो बेहद मामूली अंतर से जीत दर्ज कर राष्ट्रपति बने।

Venezuela President Story: साधारण परिवार, असाधारण राजनीतिक उभार
13 नवंबर 1962 को कराकस में जन्मे मादुरो एक साधारण मजदूर परिवार से आते हैं। उनके पिता ट्रेड यूनियन से जुड़े थे, जिससे मादुरो को शुरुआती दिनों में ही श्रमिक राजनीति की समझ मिली। पढ़ाई बीच में छोड़ने के बाद उन्होंने बस ड्राइवर के तौर पर काम किया और वहीं से यूनियन लीडर बने। यही मंच आगे चलकर उनकी राजनीतिक पहचान बना।
Venezuela President Story: क्यूबा, वामपंथ और चावेज से नजदीकी
1980 के दशक में मादुरो ने क्यूबा में राजनीतिक प्रशिक्षण लिया, जहां लैटिन अमेरिका के वामपंथी विचारों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इसी दौर में उनकी नजदीकी ह्यूगो चावेज से बढ़ी। 1999 में चावेज के राष्ट्रपति बनने के बाद मादुरो नेशनल असेंबली पहुंचे और धीरे-धीरे सरकार के सबसे भरोसेमंद चेहरों में शामिल हो गए। वे विदेश मंत्री और बाद में उपराष्ट्रपति बनाए गए।
Venezuela President Story: भारत कनेक्शन और सत्य साईं बाबा
मादुरो का भारत से भी एक आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। वे सत्य साईं बाबा को अपना गुरु मानते थे और पुट्टपर्थी स्थित आश्रम में दर्शन के लिए आए थे। उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस भी इस आध्यात्मिक प्रभाव से जुड़ी रहीं। सत्य साईं बाबा के निधन पर वेनेजुएला में राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाना इस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है।
23 नवंबर 2025 को भी मादुरो ने अपने गुरु की शताब्दी मनाई, उन्होंने आधिकारिक बयान जारी कर साईं बाबा को ‘प्रकाश का स्वरूप’ बताया और लिखा ‘मैं हमेशा उन्हें याद करता हूं, जब हम मिले थे. इस महान शिक्षक की बुद्धि हमें हमेशा रोशन करती रहे।

Venezuela President Story: विवादित चुनाव और विपक्ष का विरोध
राष्ट्रपति बनने के बाद मादुरो ने कई चुनाव जीते, लेकिन हर बार विपक्ष ने धांधली के आरोप लगाए। 2018 और 2024 के चुनावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कई बार विपक्षी नेताओं को वैध राष्ट्रपति माना, जबकि सत्ता पर मादुरो का नियंत्रण बना रहा।
Venezuela President Story: जानलेवा हमले और तख्तापलट की कोशिशें
मादुरो के कार्यकाल में उन पर कई बार जानलेवा हमले हुए। 2018 में ड्रोन अटैक, 2020 में समुद्री रास्ते से तख्तापलट की कोशिश और 2024 में हथियारों की बड़ी बरामदगी—इन घटनाओं ने वेनेजुएला की राजनीति को और अस्थिर कर दिया। मादुरो ने हर बार इन साजिशों के पीछे अमेरिका और उसके सहयोगियों का हाथ बताया।

Venezuela President Story: अमेरिका से टकराव और गिरफ्तारी
अमेरिका लंबे समय से मादुरो पर ड्रग तस्करी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा है। उन्हें ‘नार्को-टेररिस्ट’ तक घोषित किया गया। हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी सेना द्वारा मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत लिया गया, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यहां तक कहा कि वेनेजुएला की सत्ता फिलहाल अमेरिका की निगरानी में रहेगी।
Venezuela President Story: आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि मादुरो पर लंबे समय तक मुकदमा चल सकता है, जबकि वेनेजुएला में विपक्ष नई सरकार के गठन की तैयारी कर सकता है। यह देखना अहम होगा कि सत्ता का यह संघर्ष देश को स्थिरता की ओर ले जाता है या एक नए राजनीतिक संकट की ओर।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी के पकड़े जाने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, “वेनेज़ुएला में हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय हैं. हम वहां की बदलती स्थिति पर क़रीबी नज़र रखे हुए हैं। बयान में कहा गया, भारत वेनेज़ुएला के लोगों की सुरक्षा और उनकी भलाई के लिए अपने समर्थन को फिर से दोहराता है. हम सभी संबंधित पक्षों से अपील करते हैं कि मुद्दों का समाधान बातचीत के ज़रिए और शांतिपूर्ण तरीक़े से किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।
Venezuela President Story: संपादकीय नजरिया:
वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को अमेरिका लोकतंत्र की बहाली के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन यह घटना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ताकतवर देशों की दखलंदाजी का एक गंभीर उदाहरण भी है। किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को बाहरी सैन्य कार्रवाई के जरिए हिरासत में लेना केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कदम नहीं, बल्कि उस देश की संप्रभुता पर सीधा प्रहार है।
यह सच है कि मादुरो सरकार पर चुनावी धांधली, मानवाधिकार उल्लंघन और सत्ता के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन आरोपों के निपटारे का अधिकार किसी एक देश को है? अमेरिका लंबे समय से वेनेजुएला के तेल संसाधनों और वहां की सत्ता पर प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। “लोकतंत्र” और “ड्रग्स के खिलाफ जंग” जैसे तर्क अक्सर रणनीतिक हितों को ढकने का माध्यम बनते रहे हैं।
मादुरो की गिरफ्तारी से वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता लौटने के बजाय अराजकता बढ़ने का खतरा अधिक है। सत्ता परिवर्तन अगर जनता की इच्छा और संवैधानिक प्रक्रिया से नहीं होता, तो वह टिकाऊ नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह मध्यस्थ की भूमिका निभाए, न कि किसी देश की सत्ता अपने हाथ में लेने का दावा करे। वेनेजुएला का भविष्य बंदूक और दबाव से नहीं, बल्कि संवाद, निष्पक्ष चुनाव और राष्ट्रीय सहमति से तय होना चाहिए। यही लोकतंत्र की सच्ची परीक्षा है।

