Tourism Sakhis Model : MP के अभिनव मॉडल को देशभर में मंजूरी,‘महिला पर्यटन मॉडल’ देशभर में होगा लागू
Tourism Sakhis Model : मध्यप्रदेश का ‘टूरिज्म सखियां’ मॉडल अब देशभर में महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बनकर उभरा है। राज्य में शुरू की गई इस अभिनव पहल को बड़ी सफलता मिलने के बाद नीति आयोग ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की मंजूरी दे दी है। पर्यटन स्थलों, घाटों और जंगलों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल में स्थानीय महिलाओं को ‘टूरिज्म सखी’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। ये सखियां पर्यटकों की सहायता, मार्गदर्शन, सुरक्षा और स्थानीय संस्कृति की जानकारी देने का कार्य करती हैं, जिससे महिला पर्यटकों का भरोसा भी बढ़ा है। मध्यप्रदेश का यह मॉडल न केवल महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है, बल्कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षित, समावेशी और भरोसेमंद माहौल तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यही वजह है कि ‘टूरिज्म सखियां’ आज मध्यप्रदेश पर्यटन में सकारात्मक बदलाव की नई पहचान बन चुकी हैं। नीति आयोग के आकलन में यह मॉडल महिला-अनुकूल और सुरक्षित पर्यटन व्यवस्था विकसित करने में प्रभावी पाया गया। इसी के आधार पर अब उत्तराखंड, महाराष्ट्र सहित पांच राज्यों में भी इस मॉडल को लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस योजना के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने निर्भया फंड से विशेष बजट का भी प्रावधान किया है। यह मॉडल मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड ने यूएन विमेन इंडिया के तकनीकी सहयोग से विकसित किया है। इसका उद्देश्य पर्यटन स्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने के साथ-साथ स्थानीय महिलाओं को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

Tourism Sakhis Model : भारत में पर्यटन केवल सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधि भर नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का भी प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। इसी सोच को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को पर्यटन विकास के साथ जोड़कर एक ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसकी सफलता ने अब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना ली है। नीति आयोग द्वारा इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने की मंजूरी दिए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी और महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास भविष्य की पर्यटन नीति का महत्वपूर्ण आधार बनने जा रहा है। निर्भया फंड के सहयोग से विकसित यह पहल न केवल पर्यटन स्थलों को अधिक सुरक्षित बना रही है, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका, नेतृत्व और आर्थिक स्वावलंबन के नए द्वार भी खोल रही है।
Tourism Sakhis Model : भोपाल में एमपी टूरिज्म बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नीति आयोग ने इस प्रोजेक्ट का एक विस्तृत मूल्यांकन किया था। असेसमेंट में पाया गया कि ‘सेफ टूरिस्ट डेस्टिनेशन फॉर विमेन’ पहल ने न केवल सैलानियों की सुरक्षा बढ़ाई, बल्कि महिलाओं को आतिथ्य, डिजिटल स्किल और एंटरप्रेन्योरशिप में ट्रेन कर आत्मनिर्भर बनाया। टूरिज्म सखियों ने पर्यटन स्थलों पर चाइल्डकैअर सपोर्ट और सुरक्षित सुविधाएं भी शुरू की हैं, जिससे महिला पर्यटकों का स्टे बढ़ा है। यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा ने भी भोपाल दौरे पर स्थानीय महिलाओं के इस नेतृत्व की तारीफ की थी। एमपी की इस प्रशासनिक सफलता को देखते हुए उत्तराखंड और महाराष्ट्र ने इस मॉडल को लागू करना शुरू कर दिया है, जबकि गुजरात, केरल और दिल्ली जैसे राज्य मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की मदद से इसे अपने यहां शुरू करने का खाका तैयार कर रहे हैं।
Tourism Sakhis Model : मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा विकसित महिला सुरक्षित पर्यटन मॉडल ने देश में एक नई प्रशासनिक और सामाजिक मिसाल प्रस्तुत की है। इस मॉडल का मूल उद्देश्य केवल महिला पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि स्थानीय महिलाओं को पर्यटन गतिविधियों का सक्रिय भागीदार बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है। नीति आयोग द्वारा किए गए विस्तृत मूल्यांकन में यह पाया गया कि इस योजना ने पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सहभागिता को भी अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया है। यही कारण है कि अब केंद्र सरकार इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत के पर्यटन क्षेत्र में समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकती है।
Tourism Sakhis Model : इस योजना की सबसे बड़ी सफलता उन हजारों महिलाओं की कहानी है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जीवन की दिशा बदल दी। आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को पर्यटन, आतिथ्य सेवा, संवाद कौशल, डिजिटल तकनीक, प्राथमिक उपचार, आपदा प्रबंधन, पर्यटक सहायता तथा उद्यमिता का प्रशिक्षण देकर उन्हें ‘टूरिज्म सखी’ के रूप में विकसित किया गया। आज यही महिलाएं पर्यटकों का मार्गदर्शन कर रही हैं, स्थानीय संस्कृति और विरासत से परिचित करा रही हैं तथा सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया आधार मिला है। इस मॉडल ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि अवसर और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व स्थापित कर सकती हैं।
Tourism Sakhis Model : इस योजना का प्रभाव मध्यप्रदेश के अनेक प्रमुख पर्यटन स्थलों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। महेश्वर और भेड़ाघाट जैसे प्रसिद्ध नर्मदा घाटों पर जहां पहले नाव संचालन लगभग पूरी तरह पुरुषों तक सीमित था, वहीं अब प्रशिक्षित महिलाएं भी सफलतापूर्वक नौकायन कर पर्यटकों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। शिवपुरी स्थित माधव राष्ट्रीय उद्यान में बड़ी संख्या में महिला वन मार्गदर्शकों की नियुक्ति ने पर्यटन अनुभव को नई दिशा दी है। बेहतर प्रशिक्षण, प्रशासनिक सहयोग और बढ़ते विश्वास के कारण इन महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। झाबुआ, धार, बड़वानी, जबलपुर तथा अन्य आदिवासी जिलों में सामुदायिक पर्यटन की अवधारणा को भी इस मॉडल ने मजबूत आधार प्रदान किया है, जिससे स्थानीय हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और पारंपरिक उत्पादों को भी नया बाजार प्राप्त हो रहा है।
Tourism Sakhis Model : नीति आयोग के अध्ययन में यह तथ्य भी सामने आया कि यह मॉडल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी बन चुका है। महिलाओं को डिजिटल कौशल, वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता, आतिथ्य प्रबंधन तथा नेतृत्व क्षमता का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया है। अनेक पर्यटन स्थलों पर बाल देखभाल सुविधाएं, महिला सहायता केंद्र, सुरक्षित विश्राम स्थल तथा स्थानीय सहायता तंत्र विकसित किए गए हैं, जिससे महिला पर्यटकों का विश्वास बढ़ा है और उनके ठहरने की अवधि में भी वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन और हस्तशिल्प व्यवसाय को भी प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। विशेषज्ञ इसे महिला नेतृत्व आधारित सतत पर्यटन विकास का सफल भारतीय मॉडल मान रहे हैं।
Tourism Sakhis Model : संयुक्त राष्ट्र महिला भारत के तकनीकी सहयोग से विकसित इस मॉडल की सफलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक पहचान बनाई है। उत्तराखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने इसे अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, जबकि गुजरात, केरल और दिल्ली सहित अन्य राज्य भी मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से इसी तर्ज पर अपनी योजनाएं तैयार कर रहे हैं। केंद्र सरकार निर्भया फंड के माध्यम से राज्यों को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराकर इस मॉडल का व्यापक विस्तार करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह महिला सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था, सतत पर्यटन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में देश के लिए एक परिवर्तनकारी पहल साबित हो सकती है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल भारत को महिला-अनुकूल और सुरक्षित पर्यटन गंतव्य के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

