भैया, ना खुशियाँ खरीद पाया, ना ग़मों का ठेला खोल पाया, फिर भी हर सुबह “सेल” लगा कर कमाने निकल…
Hasya Hathauda : मैं गौ माता हूं, मुझे मेरी नहीं हम सबकी चिंता है, इसलिए मैं की जगह हम शब्द…
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