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Hasya Hathauda 14 : कमाई की दौड़, रिश्तों की होड़, खुशियों की EMI पर ज़िंदगी !

भैया, ना खुशियाँ खरीद पाया, ना ग़मों का ठेला खोल पाया, फिर भी हर सुबह “सेल” लगा कर कमाने निकल