by: vijay nandan,
SupremeCourt 7 January: नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट में देशभर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुनवाई जारी है। इस दौरान शीर्ष अदालत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अंदाजा लगाना संभव नहीं है कि किसी कुत्ते के दिमाग में क्या चल रहा है और वह कब किसी व्यक्ति पर हमला कर दे। कोर्ट ने माना कि आवारा कुत्ते न सिर्फ रेबीज फैलने का खतरा बढ़ाते हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की वजह भी बन रहे हैं।

SupremeCourt 7 January: स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशनों से हटेंगे आवारा कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ कर रही है। अदालत ने पहले ही स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील और संस्थागत क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट का कहना है कि नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन कुत्तों को आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

SupremeCourt 7 January: नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को आश्रय स्थलों में भेजने पर कोर्ट का जोर
सुनवाई के दौरान डॉग लवर्स की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि सभी आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह न तो शारीरिक रूप से संभव है और न ही आर्थिक रूप से व्यवहार्य। साथ ही, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस समस्या का समाधान वैज्ञानिक तरीकों से किया जाना चाहिए और मौजूदा कानूनों का सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है।
SupremeCourt 7 January: आवारा कुत्तों का खतरा बढ़ा, कानून पालन पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
इस पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रोकथाम इलाज से बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि अदालत का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि नियमों और कानूनों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि जिन राज्यों ने अब तक इस मामले में जवाब दाखिल नहीं किया है, उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा।
SupremeCourt 7 January: पीठ ने कहा– नियमों का पालन नहीं हो रहा, जवाब न देने वाले राज्यों पर होगी सख्त कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब देश के कई हिस्सों में आवारा कुत्तों के हमलों और उससे जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अदालत ने यह साफ संकेत दिया है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और राज्य सरकारों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

SupremeCourt 7 January: वर्ष 2001–2002 से कुत्तों को मारने पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों को मारना गैरकानूनी है। कोर्ट ने कहा कि समस्या का समाधान हत्या नहीं, बल्कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) यानी नसबंदी कार्यक्रम है।
वर्ष 2009: नसबंदी और टीकाकरण पर जोर
कोर्ट ने नगर निकायों को निर्देश दिए कि वे
आवारा कुत्तों की नसबंदी कराएं
रेबीज टीकाकरण सुनिश्चित करें
कुत्तों को पकड़कर मारने की बजाय वैज्ञानिक तरीके अपनाएं
वर्ष 2015: पशु अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि
“जानवरों को भी जीने का अधिकार है।”
कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि मानव और पशु अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है।
वर्ष 2021: बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता
कोर्ट ने बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि
बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है
नगर निगम जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते
वर्ष 2022: फीडिंग को लेकर संतुलित रुख
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्तों को खाना खिलाना अपराध नहीं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए, फीडिंग के लिए स्थानीय प्रशासन नियम तय करे।

