BY: MOHIT JAIN
दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून में किए गए 3 बड़े बदलावों पर अंतिम फैसला आने तक स्टे लगा दिया है। इनमें वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का नियम शामिल है। दो जजों की पीठ ने इस कानून के खिलाफ दायर पांच याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के सदस्यों की योग्यता, गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या और जिला कलेक्टर की शक्तियों से जुड़े प्रावधानों पर स्टे दिया है। ।
कानून और विवाद
वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को संसद के बजट सत्र के दौरान पास किया गया था। लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत से मंजूरी मिलने के बाद 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे अपनी स्वीकृति दी। हालांकि, देश के कई हिस्सों में इस कानून का विरोध हुआ और अंततः सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं।
सुनवाई के दौरान कौन-कौन थे मौजूद?
याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और धवन ने पैरवी की। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में उपस्थित थे।
वक्फ बाय यूजर पर स्थिति
पहले के कानून में “वक्फ बाय यूजर” का प्रावधान था, जिसके तहत किसी संपत्ति पर लंबे समय से वक्फ का कब्ज़ा होने पर वह वक्फ संपत्ति मानी जाती थी, भले ही उसके कागजात मौजूद हों या न हों। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर अभी कोई निर्णय नहीं दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख आदेश
- वक्फ बोर्ड सदस्यता की शर्त
पहले: संशोधन अधिनियम 2025 में यह प्रावधान था कि केवल वे लोग ही वक्फ बोर्ड के सदस्य बन सकते हैं, जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम धर्म का पालन कर रहे हों। अब: सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान पर रोक लगाते हुए कहा कि जब तक राज्य सरकारें नियम नहीं बनातीं, यह शर्त लागू नहीं होगी।
- गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या
पहले: कानून के अनुसार वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में गैर-मुस्लिमों को भी शामिल किया जा सकता था। अब: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड में 3 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकते। केंद्रीय वक्फ परिषद में भी गैर-मुस्लिमों की संख्या 4 से अधिक नहीं होगी। साथ ही, यदि संभव हो तो बोर्ड का सीईओ मुस्लिम सदस्य ही होना चाहिए।
- जिला कलेक्टर के अधिकार
पहले: संशोधन अधिनियम में जिला कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था कि वह तय करे कि जिस संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का कब्जा है, वह सरकारी है या नहीं।
अब: सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिकार पर रोक लगाते हुए कहा कि किसी अधिकारी को नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। यह ‘शक्तियों के पृथक्करण’ (Separation of Power) के सिद्धांत के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम 2025 को पूरी तरह रद्द करने से तो इनकार कर दिया, लेकिन इसके कई विवादित प्रावधानों पर रोक लगाकर बड़ा संदेश दिया है। अब सरकार को नए नियम बनाने और कोर्ट की टिप्पणियों के अनुरूप संशोधन करने होंगे।





