Parliament Attack: 13 दिसंबर 2001 का दिन भारत के लोकतंत्र के इतिहास में एक काली तारीख के रूप में दर्ज है। इस दिन देश की सर्वोच्च संस्था संसद भवन को आतंकियों ने निशाना बनाया और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। शीतकालीन सत्र के दौरान हुए इस हमले का मकसद संसद को उड़ाकर देश में दहशत फैलाना था।
Parliament Attack: शीतकालीन सत्र के बीच संसद पर हमला

13 दिसंबर 2001 की सुबह संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, नेता प्रतिपक्ष सोनिया गांधी समेत कई बड़े नेता उस दिन संसद परिसर में मौजूद थे। हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित की गई थी। इसी दौरान करीब 11 बजकर 29 मिनट पर एक सफेद एंबेसडर कार तेज रफ्तार में संसद परिसर के भीतर घुस आई। आतंकियों ने उपराष्ट्रपति के काफिले की कार को टक्कर मार दी और हमला शुरू कर दिया।
Parliament Attack: 9 लोगों की हुई थी मौत
आतंकियों के पास AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार थे। सब इंस्पेक्टर जीतराम समेत सुरक्षाबलों ने बहादुरी से मोर्चा संभाला। आतंकियों ने संसद भवन को उड़ाने के लिए तार बिछाने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाबलों ने समय रहते उन्हें रोक लिया। मुठभेड़ में पांच आतंकी मारे गए, जिनमें एक ने खुद को बम से उड़ा लिया। इस हमले में आठ सुरक्षाकर्मी और संसद का एक कर्मचारी शहीद हो गया।
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मास्टरमाइंड अफजल गुरु और जांच की कहानी

जांच के दौरान सामने आया कि हमले में इस्तेमाल की गई कार दिल्ली के एक दुकानदार हरपाल सिंह से खरीदी गई थी। यह कार अफजल गुरु और उसके साथी ने हमले से दो दिन पहले खरीदी थी। जांच में अफजल गुरु को इस आतंकी साजिश का मास्टरमाइंड बताया गया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 को फांसी की सजा दी गई।
संसद पर हुआ यह आतंकी हमला भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती था, लेकिन सुरक्षाबलों की बहादुरी और बलिदान ने देश के लोकतंत्र को बचा लिया। यह घटना आज भी याद दिलाती है कि आतंक के खिलाफ सतर्कता और एकजुटता कितनी जरूरी है।





