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Swadesh News > देश- विदेश > Pakistan Shia Controversy : आसिम मुनीर का जहरीला बयान, अपने ही देश के शिया मुसलमानों से कहा ईरान पसंद है तो वहीं चले जाओ
देश- विदेश

Pakistan Shia Controversy : आसिम मुनीर का जहरीला बयान, अपने ही देश के शिया मुसलमानों से कहा ईरान पसंद है तो वहीं चले जाओ

Vijay Nandan (वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल एडिटर)
Last updated: March 21, 2026 5:41 pm
By Vijay Nandan (वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल एडिटर)
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7 Min Read
pakistan shia controversy munir statement on iran
pakistan shia controversy munir statement on iran
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Vijay Nandan (वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल एडिटर)

Pakistan Shia Controversy : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तान में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इसकी वजह देश के सेना प्रमुख आसिम मुनीर का वह बयान है, जिसमें उन्होंने शिया समुदाय को लेकर तीखी टिप्पणी की। उनके इस बयान के बाद देश में राजनीतिक और सांप्रदायिक बहस तेज हो गई है। खबरों के मुताबिक, रावलपिंडी में आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख ने शिया धर्मगुरुओं से मुलाकात की। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा कि यदि किसी को ईरान से इतना लगाव है, तो वह वहां जाकर रह सकता है। इस टिप्पणी को शिया नेताओं ने आपत्तिजनक और भड़काऊ बताया है। उनका कहना है कि इससे पूरे समुदाय को निशाना बनाया गया है।

Contents
Pakistan Shia Controversy : पाकिस्तान के भीतर ईरान को लेकर शिया समुदाय ने किया था विरोध प्रदर्शनPakistan Shia Controversy : पाकिस्तान में अहमदिया और मुहाजिर (भारत के गए मुल्लिम) भेदभाव के शिकारPakistan Shia Controversy : मुहाजिर समुदाय और भेदभाव का मुद्दाRead More : iran-india-relations : ईरान और भारत के बीच कट्टरता की छवि से परे रिश्तों में प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की गहराई

Pakistan Shia Controversy : पाकिस्तान के भीतर ईरान को लेकर शिया समुदाय ने किया था विरोध प्रदर्शन

यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है, जिससे क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं। इसी बीच पाकिस्तान के भीतर भी इन घटनाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें कुछ जगहों पर हिंसा की खबरें सामने आईं। बताया जा रहा है कि इन प्रदर्शनों के बाद सेना प्रमुख ने चेतावनी दी थी कि किसी अन्य देश की घटनाओं के आधार पर पाकिस्तान में अशांति फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी हालांकि शिया समुदाय के नेताओं का आरोप है कि इन घटनाओं के लिए उन्हें गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

Pakistan Shia Controversy
पाकिस्तान के शिया धर्मगुरु मुहम्मद शिफा नजफी

प्रमुख शिया धर्मगुरु मुहम्मद शिफा नजफी ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि किसी एक समुदाय को सामूहिक रूप से दोषी ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का संबंध भी शिया पृष्ठभूमि से था और देश के निर्माण में इस समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

पाकिस्तान में शिया आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 15 प्रतिशत मानी जाती है, जो इसे ईरान के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शिया समुदाय बनाती है। इसके साथ ही देश की विदेश नीति में भी हाल के समय में बदलाव देखने को मिला है। पाकिस्तान का झुकाव सऊदी अरब और खाड़ी देशों की ओर बढ़ता नजर आ रहा है, जबकि उसने हालिया घटनाओं में ईरान की कार्रवाई की आलोचना भी की है। हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने संतुलित रुख अपनाते हुए बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। इसके बावजूद, सेना प्रमुख के बयान ने देश के भीतर सांप्रदायिक संवेदनशीलता और विदेश नीति दोनों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Pakistan Shia Controversy : पाकिस्तान में अहमदिया और मुहाजिर (भारत के गए मुल्लिम) भेदभाव के शिकार

पाकिस्तान का सामाजिक ढांचा केवल शिया-सुन्नी विभाजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अन्य मुस्लिम समुदाय भी शामिल हैं, जिनकी स्थिति और भी जटिल है। अहमदिया समुदाय को पाकिस्तान के संविधान के तहत गैर-मुस्लिम घोषित किया गया है। उन्हें अपने धार्मिक प्रतीकों और पहचान को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने पर भी कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, बलूच, पश्तून, सिंधी और पंजाबी जैसे जातीय समूहों के बीच भी राजनीतिक और सामाजिक असमानताएं देखी जाती हैं। इस तरह पाकिस्तान का समाज धार्मिक और जातीय विविधताओं से भरा हुआ है, लेकिन इन विविधताओं के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Pakistan Shia Controversy
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के प्रमुख हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद

Pakistan Shia Controversy : मुहाजिर समुदाय और भेदभाव का मुद्दा

1947 में भारत के विभाजन के बाद बड़ी संख्या में मुसलमान भारत से पाकिस्तान गए, जिन्हें “मुहाजिर” कहा जाता है। ये लोग मुख्य रूप से उत्तर भारत के शहरों से कराची, हैदराबाद (सिंध) और अन्य शहरी इलाकों में बस गए। शुरुआती दौर में मुहाजिर समुदाय शिक्षित और प्रशासनिक रूप से मजबूत था, जिससे उन्हें सरकारी नौकरियों और शहरी ढांचे में महत्वपूर्ण स्थान मिला। लेकिन समय के साथ स्थानीय सिंधी, पंजाबी और अन्य जातीय समूहों के साथ उनका टकराव बढ़ने लगा। मुहाजिरों पर “बाहरी” होने का आरोप लगाया गया और उन्हें कई बार सामाजिक और राजनीतिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। कराची जैसे शहरों में यह तनाव कई बार हिंसक झड़पों में भी बदल गया।

Pakistan Shia Controversy
पाकिस्तान के मुहाजिर नेता अल्ताफ हुसैन

मुहाजिर समुदाय के अधिकारों के लिए राजनीतिक दल भी उभरे, जैसे MQM (मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट) जिसने उनकी आवाज उठाने का काम किया। लेकिन इसके बावजूद आज भी मुहाजिर समुदाय खुद को पूरी तरह मुख्यधारा में शामिल महसूस नहीं करता। पाकिस्तान में धार्मिक और जातीय पहचान अक्सर राजनीतिक और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करती है। शिया, अहमदिया और मुहाजिर जैसे समुदायों के साथ होने वाला भेदभाव यह दर्शाता है कि देश में समानता और समावेशन की दिशा में अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान का समाज कई स्तरों पर विभाजित है, जहां धार्मिक और जातीय पहचान के आधार पर भेदभाव की घटनाएं सामने आती रहती हैं। यह स्थिति न केवल आंतरिक स्थिरता के लिए चुनौती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की छवि को प्रभावित करती है।

Read More : iran-india-relations : ईरान और भारत के बीच कट्टरता की छवि से परे रिश्तों में प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की गहराई

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By Vijay Nandan (वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल एडिटर)
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लगभग 20 वर्षों का अनुभव इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का है, जहां कई प्रमुख न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया। पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और खबरों को नई तकनीक व तेज रिपोर्टिंग स्टाइल के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। समाचारों की गहराई, निष्पक्षता और सटीकता पहचान है।
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