New Year 2026: ‘राष्ट्रकथा शिविर’ में बोले मुख्यमंत्री, युवाओं को किताबी नहीं व्यवहारिक ज्ञान की जरूरत
New Year 2026: राजकोट/उपलेटा।, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीव मात्र का समग्र कल्याण ही मानवता का पहला लक्ष्य है और “जियो और जीने दो” हमारे जीवन का शाश्वत दर्शन है। उन्होंने कहा कि परमार्थ, नेकी और देशभक्ति का भाव हम सभी में रक्त की तरह प्रवाहित होना चाहिए। मुख्यमंत्री गुरुवार को गुजरात के राजकोट जिले के प्रांसला के समीप उपलेटा में श्री वैदिक मिशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित 26वें ‘राष्ट्रकथा शिविर’ को संबोधित कर रहे थे।

New Year 2026: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की संस्कृति नैतिक शिक्षा, राष्ट्रभक्ति और संस्कारयुक्त जीवन पद्धति की लंबी परंपरा से समृद्ध है। यह भारतीयों का स्व-अनुशासन ही है, जिसके कारण आज भारत विश्व की महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भारतीय मातृ-सत्तात्मक संस्कृति में माताओं और बहनों को देवी के रूप में सम्मान दिया जाता है और बच्चा-बच्चा “भारत माता की जय” कहकर राष्ट्रमाता को नमन करता है।
New Year 2026: स्वामी जी ने दी है हम सबको नई जीवन दृष्टि
मुख्यमंत्री ने शिविर में सहभागिता कर श्री वैदिक मिशन ट्रस्ट के गुजरात प्रमुख और महान विचारक स्वामी धर्मबंधु जी महाराज का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामी जी ने समाज को नई जीवन दृष्टि दी है और हम सभी को अपने जीवन में सदैव अच्छे कार्य करने का प्रयास करना चाहिए।
डॉ. यादव ने कहा कि किताबी ज्ञान से अधिक जरूरी व्यवहारिक और वास्तविक ज्ञान है। युवाओं को उनकी असीम शक्तियों का बोध कराना समय की आवश्यकता है। “वसुधैव कुटुम्बकम” हमारी संस्कृति का मूल उद्देश्य है, जिसे और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाना होगा।
New Year 2026: मुख्यमंत्री ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल श्री सोमनाथ धाम सनातन संस्कृति की महान धरोहर है। नए साल के पहले दिन उन्होंने सोमनाथ में महादेव के दर्शन कर राष्ट्र और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कोविड काल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब भारत ने अपनी संकल्प शक्ति, संयमित जीवनशैली और वैज्ञानिक सोच के बल पर न केवल स्वयं को सुरक्षित रखा, बल्कि 40 से अधिक देशों को वैक्सीन भेजकर मानवता की सेवा की। यही हमारी परोपकारी संस्कृति है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि नैतिक और संस्कारयुक्त नागरिक तैयार करना है। भारतीय समाज में स्वाभाविक स्व-अनुशासन है, जिसके कारण सीमित सुरक्षा बलों के बावजूद देश सुरक्षित और लोकतांत्रिक रूप से मजबूत बना हुआ है। उन्होंने भारतीय सेना और सुरक्षाबलों के साहस और बलिदान को नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान गुजरात सरकार के उच्च और तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री श्री त्रिकमभाई बिजलभाई छंगा ने कहा कि मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। स्वामी जी का यह प्रयास युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित कर रहा है, जो सच्ची राष्ट्रभक्ति का उदाहरण है।

कार्यक्रम की शुरुआत में पूज्य स्वामी जी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित सभी अतिथियों का गुजराती पगड़ी और अंगवस्त्र से स्वागत किया। मुख्यमंत्री को राष्ट्रकथा शिविर की पुस्तक भेंट की गई। इससे पूर्व उन्होंने तटरक्षक बल की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।

