Report: Ratan kumar
Jamtara जामताड़ा जिले में महीनों से जारी अवैध बालू खनन के खिलाफ प्रशासन ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उपायुक्त रवि आनंद और जिला खनन पदाधिकारी मिहिर सालकर के कड़े रुख के बाद जिला टास्क फोर्स ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। पिछले 72 घंटों के भीतर नाला विधानसभा क्षेत्र में हुई दो बड़ी छापेमारी ने बालू माफियाओं के सिंडिकेट में हड़कंप मचा दिया है।
Jamtara तीन दिन, दो बड़ी कार्रवाई: जब्त हुआ बालू का ‘पहाड़’
प्रशासनिक टीम ने मंगलवार को नाला थाना क्षेत्र के महेशमुंडा और रूनाकूड़ा घाट पर बड़ी स्ट्राइक की। माइनिंग इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में जंगलों के बीच छिपाकर रखा गया लगभग 15,000 CFT बालू बरामद किया गया। इस अवैध स्टॉक को उठाने के लिए विभाग को 3 जेसीबी और दर्जनों हाईवा का सहारा लेना पड़ा। इससे पहले शनिवार को बिन्दापाथर के तुम्बाबेला में भी 9,000 CFT बालू जब्त कर अज्ञात माफियाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
Jamtara सीमा पार तस्करी: बिहार से नेपाल तक फैला जाल
छापेमारी के बावजूद हकीकत यह है कि बालू का अवैध कारोबार पूरी तरह थमा नहीं है। जामताड़ा प्रखंड की पंजनियां पंचायत स्थित बाड़ेडीह घाट अब भी तस्करी का मुख्य केंद्र बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, शाम ढलते ही यहाँ नावें सक्रिय हो जाती हैं और हाईवा के जरिए जामताड़ा का कीमती बालू बिहार, पश्चिम बंगाल और यहाँ तक कि नेपाल तक भेजा जा रहा है।
Jamtara बड़ा सवाल: 9 महीने तक क्यों मौन रहा विभाग?
प्रशासन की इस अचानक बढ़ी सक्रियता ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। स्थानीय चर्चाओं में यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर पिछले 9 महीनों से जून के महीने से चल रहे इस खुलेआम लूट पर विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी? क्या यह कार्रवाई केवल दिखावा है या फिर बाड़ेडीह जैसे सक्रिय घाटों पर भी प्रशासन का डंडा चलेगा, यह देखने वाली बात होगी।
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