Hasya Hathauda : भैया, एक दिन अहंकार और अभिमान चाय की दुकान पर बैठे थे। अहंकार ने चाय का पहला घूंट लिया और बोला, तुम बड़े घमंडी हो।
अभिमान ने बिना चीनी वाली चाय में भी मिठास ढूंढ ली और बोला, इसमें क्या शक है? मुझे अपने घमंड पर गर्व है।
Hasya Hathauda : अहंकार मुस्कुराया, वो मुस्कान, जो आईने के सामने रोज़ अभ्यास करके आती है। घमंड तब अच्छा लगता है, जब उसके पीछे योग्यता खड़ी हो। लेकिन दंभ? दंभ तो अयोग्य आदमी का झूठा सेल्फी फिल्टर होता है।
इतने में दंभ भी आ टपका। वो ब्रांडेड कपड़े पहने था, लेकिन साइज आत्मा से दो नंबर छोटा। बोला, अरे भाई, मुझे इतना हल्का मत समझो। दंभी बनना आसान नहीं होता। इसके लिए पहले ज्ञानी बनना पड़ता है, फिर अज्ञानी।

Hasya Hathauda : अहंकार चौंक गया, ये कैसे? दंभ बोला, पहले ज्ञान लो, फिर उस ज्ञान का इस्तेमाल दूसरों को नीचा दिखाने में करो। तभी असली दंभ पैदा होता है। खाली पेट कोई दंभी नहीं बन सकता। दंभ के लिए धन, राजपाट, सत्ता, सोशल मीडिया फॉलोअर्स और चार चमचे जरूरी होते हैं।
अभिमान ने सिर हिलाया, और बोला, तू सही कह रहा है। इतिहास गवाह है और फिर रामायण-महाभारत की फाइल खुल गई।
दंभ बोला, लंका के राजा रावण को ही देख लो। वेदों का ज्ञाता, शिव भक्त, महान योद्धा। लेकिन दंभ इतना कि खुद को ही भगवान समझ बैठा। अंत में क्या हुआ? ज्ञान था, पर विवेक छुट्टी पर चला गया था।
Hasya Hathauda : अहंकार बोला, और मज़े की बात देखो, सीता हरण के लिए भिखारी बनना पड़ा। मतलब दंभ का लेवल ऐसा कि राजा होते हुए भी भिखारी का अभिनय। यही दंभ है, यानि ऊपर से ताज, अंदर से खाली।
Hasya Hathauda : अभिमान ने महाभारत की फाइल खोल दी, अब दुर्योधन को देख लो। उसके पास सत्ता थी, सेना थी, मामा था और चाचा-ताऊ, गुरू, सबसे बड़ी सेना सब सपोर्ट में थे। लेकिन दंभ ऐसा कि भरी सभा में द्रौपदी का चीर हरण करा दिया। दंभ गर्व से बोला, वो दंभ ही था जिसने कहा, देखते हैं कौन बचाता है।
अहंकार बोला, और वही दंभ कौरववंश को कब्रिस्तान तक छोड़ आया।
Hasya Hathauda : अब चाय ठंडी हो चुकी थी, लेकिन बात गरम थी।
अभिमान बोला, आज भी दंभ जिंदा है।
अहंकार ने चारों ओर देखा, कहां?
अभिमान हंसा, टीवी स्टूडियो में, राजनीति में, अफसर की कुर्सी पर, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में और सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर।
दंभ बोला, आज दंभ को न रावण चाहिए, न दुर्योधन। आज एक नीला टिक, एक सरकारी कुर्सी या एक वायरल वीडियो काफी है।
अहंकार ने हथौड़ा उठाया, समस्या ये नहीं कि इंसान सफल हो जाता है। समस्या ये है कि सफलता आते ही इंसान खुद को संविधान, कानून और भगवान, तीनों से ऊपर समझने लगता है।
अभिमान बोला, और जब कोई सवाल पूछ ले, तो दंभ कहता है, तुम जानते नहीं मैं कौन हूं!
Hasya Hathauda : हास्य की हंसी यहीं खत्म होती है। हथौड़ा यहीं गिरता है। क्योंकि इतिहास यही सिखाता है, रावण का ज्ञान उसे बचा नहीं पाया, दुर्योधन के दंभ ने पूरे कौरववंश का विनाश करा दिया। आज का दंभी कल की खबर जरूर बनता है।
अहंकार ने आख़िरी घूंट लिया और कहा, घमंड थोड़ी देर तक चलता है, दंभ थोड़ी और देर, लेकिन अंत में हथौड़ा इतिहास ही चलाता है।
हास्य-हथौड़ा में आज इतना है, व्यंग पसंद आए तो कमेंट जरूर करिए।
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