शादी का झांसा देकर क्यूआर कोड से ठगी, 19 युवतियां हिरासत में
BY
Yoganand Shrivastava
Gwalior news: क्राइम ब्रांच ने शादी का झांसा देकर ठगी करने वाले दो फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह मैट्रिमोनियल वेबसाइट के नाम पर युवाओं को फंसाकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल 19 युवतियों को हिरासत में लिया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना अब भी फरार है।
मॉडलिंग तस्वीरों से युवकों को बनाया शिकार
जांच में सामने आया है कि आरोपी मैट्रिमोनियल साइट पर युवकों का पंजीकरण कराते थे और उन्हें मॉडलिंग करने वाली युवतियों की आकर्षक और फर्जी तस्वीरें भेजते थे। इसके बाद कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियां खुद को वही लड़की बताकर भावनात्मक बातचीत शुरू करती थीं और शादी का भरोसा दिलाती थीं।
क्यूआर कोड के जरिए की जाती थी रकम की वसूली
भरोसा जीतने के बाद अलग-अलग बहानों से युवकों को क्यूआर कोड भेजे जाते थे। शादी की तैयारी, रजिस्ट्रेशन शुल्क या निजी जरूरतों के नाम पर उनसे पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे। मोटी रकम मिलते ही आरोपी संपर्क तोड़ देते थे।
मयूर नगर से पहला कॉल सेंटर पकड़ा गया
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि थाटीपुर थाना क्षेत्र के मयूर नगर में एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित हो रहा है। दबिश के दौरान मयूर प्लाजा के पीछे एक मकान की पहली मंजिल पर कॉल सेंटर चलता मिला। मौके से 12 युवतियों को पकड़ा गया, जो लैपटॉप और रजिस्टर के जरिए ठगी को अंजाम दे रही थीं।
संचालक के रूप में युवती की भूमिका
पुलिस जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर का संचालन 24 वर्षीय राखी गौड़ कर रही थी, जो मुख्य आरोपी तिलेश्वर पटेल के निर्देश पर काम कर रही थी। पुलिस ने उसे और अन्य युवतियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
ज्योतिनगर में दूसरा कॉल सेंटर भी उजागर
पहले कॉल सेंटर के खुलासे के बाद पुलिस को दूसरे ठिकाने की जानकारी मिली। ज्योतिनगर क्षेत्र में द्वारिकाधीश मंदिर के सामने स्थित एक फ्लैट की दूसरी मंजिल पर दूसरा फर्जी कॉल सेंटर संचालित पाया गया। यहां से 7 युवतियों को पकड़ा गया, जिसका संचालन सीता उर्फ शीतल चौहान कर रही थी।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार, दोनों कॉल सेंटरों का मास्टरमाइंड तिलेश्वर पटेल है, जो फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
साधारण मोबाइल से कराई जाती थी ठगी
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियों को स्मार्टफोन नहीं दिए जाते थे। उन्हें केवल साधारण की-पैड मोबाइल उपलब्ध कराए जाते थे, ताकि सोशल मीडिया या चैटिंग ऐप्स का इस्तेमाल न हो सके। वारदात के बाद मोबाइल नंबर बंद कर दिए जाते थे।
डेढ़ करोड़ तक की ठगी की आशंका
पुलिस के मुताबिक, अब तक करीब 1500 लोगों से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी किए जाने के संकेत मिले हैं। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक पीड़ितों की संख्या और कुल ठगी की रकम का आकलन किया जा रहा है।
पुलिस जांच जारी
फिलहाल सभी पकड़ी गई युवतियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इसके तार अन्य शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं।





