GitaGopinath : तेल की कीमतों और युद्ध की दिशा को लेकर असमंजस, पॉलिसी मेकर्स के लिए चुनौतीपूर्ण समय
GitaGopinath : बेंगलुरु में अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने वैश्विक हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्ध के चलते दुनिया एक बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है और यह कहना मुश्किल है कि यह संघर्ष कब तक चलेगा और आने वाले समय में तेल की कीमतें किस दिशा में जाएंगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में अनिश्चितता बहुत अधिक है, जिससे नीति निर्माताओं के लिए निर्णय लेना बेहद कठिन हो गया है। तेजी से बदलते हालात के बीच आर्थिक रणनीति तय करना एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

GitaGopinath : भारत के लिए क्या है रास्ता?
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए उन्होंने भारत को लेकर सुझाव दिया कि देश को अपने घरेलू सुधारों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार करना होगा और आंतरिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जमीन और श्रम से जुड़े लेनदेन को आसान बनाने के साथ-साथ मानव संसाधन यानी ह्यूमन कैपिटल के विकास पर भी अधिक फोकस करना जरूरी है। इससे देश की आर्थिक क्षमता और प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत होंगी।
GitaGopinath : वैश्विक हालात पर नजर जरूरी
गोपीनाथ के मुताबिक, मौजूदा समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था कई अनिश्चितताओं से घिरी हुई है। ऐसे में भारत जैसे बड़े देश के लिए जरूरी है कि वह अंदरूनी मजबूती के साथ बाहरी परिस्थितियों पर भी नजर बनाए रखे।

आपको बता दें कि गीता गोपीनाथ भारत की प्रमुख अर्थशास्त्रियों में से एक हैं, जिन्होंने वैश्विक आर्थिक नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। उनका जन्म भारत में हुआ और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर भी रह चुकी हैं और मैक्रोइकॉनॉमिक्स, अंतरराष्ट्रीय वित्त और मुद्रा नीति के क्षेत्र में उनकी गहरी विशेषज्ञता मानी जाती है।
गीता गोपीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में मुख्य अर्थशास्त्री (Chief Economist) के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने वैश्विक आर्थिक नीतियों और रिसर्च को दिशा दी। बाद में वे IMF की प्रथम उप प्रबंध निदेशक (First Deputy Managing Director) भी बनीं, जो इस संस्था में एक बेहद महत्वपूर्ण पद है।
उनके कार्यकाल के दौरान दुनिया ने कोविड-19 महामारी जैसी बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना किया, जिसमें उन्होंने देशों को आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए नीतिगत सुझाव दिए। उनकी रिसर्च और विचारों को विश्वभर में सम्मान के साथ सुना जाता है। गीता गोपीनाथ को उनकी उपलब्धियों के लिए कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिल चुके हैं। वे भारत के लिए गर्व का विषय हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जाती हैं।

