by: vijay nandan
Gita Gopinath at WEF 2026 ; दावोस, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पूर्व प्रथम डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने कहा है कि भारत के सामने सबसे बड़ा खतरा टैरिफ या व्यापार बाधाएं नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ता प्रदूषण है। उन्होंने यह बात वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की बैठक के दौरान भारतीय मीडिया से बातचीत में कही।

गीता गोपीनाथ ने कहा कि जब आर्थिक विकास और नए निवेश की चर्चा होती है, तो फोकस आमतौर पर व्यापार नीतियों, नियमों और टैरिफ पर रहता है, जबकि प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि हकीकत यह है कि प्रदूषण भारत को किसी भी व्यापारिक प्रतिबंध से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है।

Gita Gopinath at WEF 2026 ; हर साल 17 लाख मौतें, विकास पर गहरा असर
उन्होंने वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में हर साल करीब 17 लाख लोगों की मौत प्रदूषण की वजह से होती है, जो देश में होने वाली कुल मौतों का लगभग 18% है। इतनी बड़ी संख्या में होने वाली मौतें न केवल परिवारों को तोड़ती हैं, बल्कि देश की वर्कफोर्स, उत्पादकता और आर्थिक विकास को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
गीता गोपीनाथ के मुताबिक, प्रदूषण से लोगों की काम करने की क्षमता घटती है, स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ता है और इसका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है, जिससे विकास की रफ्तार धीमी हो जाती है।

Gita Gopinath at WEF 2026 ; विदेशी निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय
उन्होंने कहा कि प्रदूषण अब सिर्फ घरेलू समस्या नहीं रहा। जो विदेशी निवेशक भारत में निवेश करने या यहां रहने की योजना बनाते हैं, वे भी पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हैं। खराब हवा, स्वास्थ्य जोखिम और रहने की बिगड़ती स्थिति निवेश को प्रभावित कर सकती है।
भारत जब खुद को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक केंद्र के रूप में पेश कर रहा है, तब साफ शहर और बेहतर जीवन स्थितियां बेहद जरूरी हैं।
Gita Gopinath at WEF 2026 ; लैंसेट रिपोर्ट की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज ने भी भारत में प्रदूषण को जानलेवा खतरा बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में PM2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों के कारण 17 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा 2010 की तुलना में करीब 38% अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इन मौतों में से लगभग 44% मामलों का संबंध कोयला और पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधनों के उपयोग से है। थर्मल पावर प्लांट और वाहनों से निकलने वाला धुआं इसकी बड़ी वजह है।
Gita Gopinath at WEF 2026 ; आर्थिक नुकसान भी भारी
लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में वायु प्रदूषण के कारण भारत को करीब 339 अरब डॉलर (लगभग 30 लाख करोड़ रुपये) का आर्थिक नुकसान हुआ, जो देश की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 9.5% है। ग्रामीण इलाकों में घरेलू ईंधन से होने वाला प्रदूषण भी गंभीर समस्या बना हुआ है, जबकि शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक और इंडस्ट्री से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
Gita Gopinath at WEF 2026 ; नीतिगत फैसलों की जरूरत
गीता गोपीनाथ ने जोर देकर कहा कि प्रदूषण से निपटना सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लोगों की जान बचाने, आर्थिक विकास को मजबूत करने और निवेश आकर्षित करने से सीधा जुड़ा हुआ है। इसके लिए पॉलिसी लेवल पर तत्काल और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
संपादकीय नजरिया :
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ का बयान भारत की नीतिगत प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने साफ कहा कि भारत के लिए टैरिफ या व्यापारिक बाधाओं से ज्यादा बड़ा खतरा प्रदूषण है। यह बात केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर देश के आर्थिक भविष्य, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक स्थिरता से जुड़ी है।
जब हर साल प्रदूषण की वजह से 17 लाख से अधिक लोगों की मौत हो रही हो, तो इसे केवल आंकड़ों की बहस मानना आत्मघाती सोच होगी। इतनी बड़ी जनहानि का असर कामकाजी आबादी, उत्पादकता और स्वास्थ्य खर्च पर पड़ता है, जिससे विकास की रफ्तार स्वतः धीमी हो जाती है। विडंबना यह है कि आर्थिक विकास की दौड़ में हम उसी हवा और पानी को जहरीला बना रहे हैं, जिस पर यह विकास टिका है।
गीता गोपीनाथ की चेतावनी विदेशी निवेशकों के नजरिये से भी अहम है। आज निवेश केवल सस्ते श्रम या बाजार के आकार पर नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और पर्यावरणीय स्थिरता पर भी निर्भर करता है। यदि भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक केंद्र बनना है, तो प्रदूषण नियंत्रण को विकास के एजेंडे के केंद्र में लाना ही होगा। अब सवाल यह नहीं है कि विकास चाहिए या पर्यावरण, बल्कि यह है कि बिना स्वच्छ पर्यावरण के विकास कब तक टिकेगा?

