BY; Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के बाद जांच एजेंसियों की नजर अब फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा तक पहुंच गई है। फरीदाबाद के एक टेरर मॉड्यूल के खुलासे में पुलवामा निवासी डॉ. उमर का नाम सामने आया है, जो हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे धमाके के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. उमर की मां और दो भाइयों — आशिक अहमद और जहूर अहमद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। परिवार को इस बात पर यकीन नहीं है कि उमर किसी भी आतंकी गतिविधि में शामिल हो सकते हैं।
उनकी भाभी ने बताया,
“हमें यकीन नहीं होता कि वो ऐसा कुछ कर सकते हैं। उन्होंने हमेशा पढ़ाई को ही जीवन का मकसद माना। आखिरी बार शुक्रवार को उनसे बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहा हूं। वो तो किताबों के अलावा कुछ जानते ही नहीं थे — सच में ‘वो किताबी कीड़ा’ था।”
परिवार का कहना है कि डॉ. उमर की मां ने कठिन परिस्थितियों में अपने बच्चों को पढ़ाया। भाभी ने कहा,
“मां ने बहुत गरीबी देखी है। हमने हमेशा यही सोचा कि अब उमर परिवार की उम्मीदों को पूरा करेंगे। वो ही घर के कमाने वाले बने थे।”
जांच एजेंसियों ने डॉ. उमर की मां का डीएनए सैंपल भी लिया है, ताकि यह पुष्टि की जा सके कि दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए व्यक्ति की पहचान उमर से मिलती है या नहीं।
गौरतलब है कि 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के सामने हुंडई i10 कार में हुए धमाके में 10 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए थे। उसी दिन जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल का भी पर्दाफाश किया था।
फरीदाबाद से 2,900 किलोग्राम IED बनाने का सामान, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए थे। यह बरामदगी अल-फलाह यूनिवर्सिटी के ही एक अन्य शिक्षक डॉ. मुजम्मिल शकील के पास से हुई थी।फिलहाल जांच एजेंसियां दिल्ली धमाके और फरीदाबाद मॉड्यूल के बीच के संबंधों की गहन पड़ताल में जुटी हैं।





