BY: MOHIT JAIN
मध्य प्रदेश में नवरात्रि शुरू होते ही गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर नया विवाद खड़ा हो गया है। छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि जैसे सनातन हिंदू लोग हज यात्रा में शामिल नहीं होते, वैसे ही मुस्लिमों को भी गरबा से दूर रहना चाहिए।
आयोजकों को दी ‘अनोखी सलाह’

धीरेंद्र शास्त्री ने गरबा आयोजकों से कहा कि पंडाल के मुख्य द्वार पर गोमूत्र रखा जाए और उससे छिड़काव किया जाए। उन्होंने यह बात छतरपुर जिले के लवकुशनगर स्थित बंबरबेनी माता मंदिर में दर्शन के दौरान कही।
BJP विधायक का भी बयान
इस विवाद पर भोपाल के भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि गैर-हिंदू भी नवरात्रि और गरबा में शामिल हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें सनातन धर्म की परंपराओं का पालन करना होगा जैसे माथे पर तिलक लगाना और आरती में शामिल होना।
शर्मा ने यह भी जोड़ा कि अगर कोई छल करके गरबा पंडाल में घुसने की कोशिश करता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर मुस्लिम या ईसाई लोग फिर से हिंदू धर्म अपनाना चाहते हैं, तो गंगाजल और तुलसी पत्र ग्रहण करके ऐसा कर सकते हैं।
विहिप और हिंदू संगठनों का रुख
इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (VHP) और अन्य हिंदू संगठनों ने भी गरबा में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर कड़ा रुख अपनाया था। उनका कहना है कि ऐसे आयोजनों में ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए सख्ती जरूरी है।
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि देवी दुर्गा और उनके विभिन्न स्वरूपों की पूजा का पर्व है। इस दौरान गुजरात से शुरू हुआ पारंपरिक नृत्य गरबा पूरे देश में लोकप्रिय हो चुका है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग लेते हैं, लेकिन इस बार धार्मिक पहचान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।





