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हास्य-हथौड़ा

Hasya Hathauda 08

Hasya Hathauda 08 : ‘रिलेशनशिप’ की नाजायज औलाद ‘कॉन्वेंट’ ! 🤔

Hasya Hathauda 08 : आज का हास्य हथौड़ा कॉन्वेंट स्कूल मानसिकता पर, ‘इंपोर्टेड है’, अगले कॉलम में पढ़िए..भैया, अंग्रेजों की गुलामी से आजादी तो हमें 1947 में मिल गई, लेकिन असली आज़ादी अभी एलकेजी में अटकी हुई है। कारण साफ़ है, कॉन्वेंट मानसिकता। आज हमारे देश में शिक्षा नहीं, इंग्लिश

Hasya Hathauda

Hasya Hathauda : मैं गौ माता हूं…और भारत का हर इंसान मेरी संतान है…?

Hasya Hathauda : मैं गौ माता हूं, मुझे मेरी नहीं हम सबकी चिंता है, इसलिए मैं की जगह हम शब्द बोलूंगी तो सुनो, हमें ये सम्मान यूँ ही नहीं मिला है।सनातन संस्कृति में पाँच हज़ार साल की साधना है हमारी।भारत के हर घर, हर मठ, हर कथा और हर धार्मिक

Hasya Hathauda swadesh news

Hasya Hathauda : अहंकार, अभिमान और दंभ, तीनों की चाय पर चर्चा… ! 😀

Hasya Hathauda : भैया, एक दिन अहंकार और अभिमान चाय की दुकान पर बैठे थे। अहंकार ने चाय का पहला घूंट लिया और बोला, तुम बड़े घमंडी हो। अभिमान ने बिना चीनी वाली चाय में भी मिठास ढूंढ ली और बोला, इसमें क्या शक है? मुझे अपने घमंड पर गर्व

Hasya Hathauda

Hasya Hathauda : कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी…

गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत शुभकामनाएं। Hasya Hathauda : भैयाजी, हम 77वां गणतंत्र मना रहे हैं, देश भक्ति तो हमारे खून में है, जब भी कोई भारत को आंख दिखाता है, हमारा खून खौल उठता है, भारत के हर घर का नारा है, हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई आपस में सब

Hasya Hathauda

Hasya Hathauda : वो मेरा गांव और पीपल के पेड़ की छांव !

Hasya Hathauda : भैया, पाठशाला का नाम सुनते ही दिमाग में पढ़ाई लिखाई और कक्षा के दृश्य छा जाते हैं, अपन के गांव में वो भी क्या दिन थे, स्कूल में टाट पट्टी, झोले में स्लेट पट्टी, दीदी आई मिठाई लाई, हिंदी की किताब, स्लैट पट्टी, लिखने का बर्तना, चॉक,

Hasya Hathauda

Hasya Hathauda : पाखंड का बोलवाला, सच का मुंह काला !

Hasya Hathauda : भैया, आजकल पाखंड कोई साधारण चीज़ नहीं रही। अब ये अकेला नहीं चलता, इसके साथ पूरा कुनबा रहता है। ढोंग इसका बड़ा भाई, आडंबर मँझला, दिखावा फुफेरा, प्रपंच मौसेरा, कपट पड़ोसी, धोखाधड़ी रिश्तेदार, नकली और बेईमानी तो घर के ही बच्चे हैं, और ढकोसला? वो तो कुल

Hasya Hathauda

Hasya Hathauda ; संस्कृति पर गर्व, संस्कारों को ‘तिलांजलि’ !

हास्य हथौड़ा, हमने अपना ही सिर फोड़ा 😀 Hasya Hathauda हमारी संस्कृति को दुनिया की सबसे समृद्धशाली संस्कृति कहा जाता है।हम भारत के लोग खुद को सबसे संस्कारी कहलाना पसंद करते हैं।लेकिन सच यह है कि हम अपने संस्कार घर से निकलने से पहले ताक पर रख देते हैं। घर

Hasya Hathoda ;

Hasya Hathoda ; हास्य-हथौड़ा, नल से पानी नहीं, व्यवस्था टपक रही है… !

Hasya Hathoda ; कहते हैं, पानी जीवन है, पर आजकल हमारे शहरों के कई इलाकों में यह जीवन का नहीं, व्यवस्था का पोस्टमार्टम करता दिख रहा है। नल खुलते ही जो बहता है, वह पानी कम और भरोसे का रिसाव ज्यादा लगता है। नागरिक उसे पीने से पहले भगवान को