Report: Sanjeev kumar
Bokaro सेक्टर-12 स्थित पुलिस लाइन मैदान में रविवार को पुलिस परिवार की ओर से ‘सरहुल पूजा महोत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। इस उत्सव में खाकी के कठोर अनुशासन के बीच आदिवासी संस्कृति की अनुपम छटा देखने को मिली। कार्यक्रम में डीआईजी आनंद प्रकाश, एसपी हरविंदर सिंह, जिले के सभी डीएसपी और पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक शिरकत की।
Bokaro पारंपरिक स्वागत और सांस्कृतिक उल्लास
Bokaro कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना से हुई।
- पगड़ी और बांडी: बोकारो पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष ने डीआईजी, एसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पारंपरिक आदिवासी पगड़ी और ‘बांडी’ पहनाकर सम्मानित किया।
- अधिकारियों का नृत्य: मांदर की थाप और लोकगीतों की गूँज ऐसी थी कि डीआईजी और एसपी समेत तमाम पुलिस पदाधिकारी खुद को रोक नहीं पाए और स्थानीय कलाकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर नृत्य करने लगे।
Bokaro सरहुल: समृद्धि और प्रकृति का प्रतीक
इस मौके पर डीआईजी आनंद प्रकाश ने सरहुल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे राज्य की आत्मा बताया।
- अस्तित्व की रक्षा: उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। हमारे जनजातीय समाज ने जिस परंपरा को जीवित रखा है, उसे आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
- जल-जंगल-जमीन: डीआईजी ने जोर देकर कहा कि अगर हमें अपना अस्तित्व बचाए रखना है, तो जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए तत्पर होना होगा। प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानवता का भविष्य सुरक्षित है।
Bokaro महिला शक्ति की सांस्कृतिक प्रस्तुति
महोत्सव के दौरान आदिवासी समाज की महिलाओं ने आकर्षक सांस्कृतिक नृत्य पेश किया, जिसने सबका मन मोह लिया। पुलिस लाइन का पूरा माहौल उत्सवमयी हो गया, जहाँ पुलिसकर्मी और उनके परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर प्रकृति की पूजा करते नजर आए।
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