Bengal Election Fish Politics : ममता का SIR और मछली कार्ड, कितना दमदार ?294 सीटों की समीक्षा, BJP –TMC की अग्निपरीक्षा ,आरोप-प्रत्यारोप, जनता किसको देगी वोट ?
Report : Rakhi Verma
Bengal Election Fish Politics : नमस्कार स्वदेश agenda देख रहे है आप, पश्चिम बंगाल के चुनाव में मछली एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है और इसी के जरिये चुनाव में जनता को लुभाने का प्रयास पक्ष विपक्ष कर रहे है | दरअसल ममता बनर्जी ने मछली के जाल में बीजेपी को ऐसे फसाया कि अब बीजेपी भी बंगाल में ‘मछली’ प्रेम के सहारे जवाबी प्रचार में उतरी है,,, ममता की अगुआई वाली तृणमूल कांग्रेस जहां भाजपा को बंगाली विरोधी और खान-पान पर रोक लगाने वाली पार्टी बताने में जुटी है, वहीं भाजपा ने इसके जवाब में एक नई रणनीति अपनाई है- ‘मछली प्रेम’ का प्रदर्शन। और तमाम दिग्गज मछली लेकर प्रचार करते नजर आ रहे है,, ऐसे में बंगाल में छिड़ा मछली मुद्दा किसे दिलाएगा सत्ता ये देखने दिलचस्प होगा | इसी पर करेंगे उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट …

Bengal Election Fish Politics : पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार ममता के साथ बीजेपी के लिए भी साख का सवाल बन गया है | यहां 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होना है, एक तरफ जहाँ ममता बनर्जी sir को लेकर चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करती नजर आ रही है, वही बंगाल की अस्मिता और खान पान को लेकर भी भाजपा पर हमलावर है…उधर भाजपा ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है, ममता के बयान के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मछली को चुनावी मुद्दा बनाया है…बंगाल में tmc पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है भाजपा के दिग्गज नेता, पीएम नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन चुनावी रैलियों में ममता को घेरने में लगे है… शिवराज ने तो tmc का मतलब ही समझा दिया |
Bengal Election Fish Politics : फिलहाल बंगाल में सियासी पारा हाई है, ममता का बंगाली मछली कार्ड और पीएम मोदी की 5 गारंटी चुनावी फिजा बदलने में कितनी कारगर होगी ये देखने वाली बात होगी लेकिन आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रतिक्रयाओं ने खूब जोर पकड़ा है |
Bengal Election Fish Politics : तृणमूल कांग्रेस जहां बांग्ला अस्मिता का जाल बुनकर इसे साधने में जुटी है, वहीं भारतीय जनता पार्टी कोशिश कर रही है कि उसका रुख बंगाल के लोगों की माछ-भात बंगाली के रूप में पहचान के खिलाफ न दिखे। और इसलिए पश्चिम बंगाल के चुनावी समंदर में इस बार मछली सिर्फ थाली तक सीमित नहीं रही, बल्कि सियासत के केंद्र में आकर तैरने लगी है। मछली अप्रत्याशित लेकिन असरदार राजनीतिक प्रतीक बन गई है। ‘रोड शो’ में लहराई जा रही विशाल कतला से लेकर हिलसा, पाबदा और चिंगड़ी मछली अब सियासी मंचों पर धमक दिखा रही हैं। और यह तय करने की होड़ मची है कि असल बंगाली का प्रतिनिधित्व आखिर कौन करता है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भाजपा उम्मीदवारों को मछली बाजारों में जाते, मछली खरीदते और सार्वजनिक रूप से खाते हुए देखा जा रहा है। उधर tmc भाजपा के इस अभियान का मजाक उड़ा रही है | बारासात से सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने तंज कसते हुए कहा कि हाथ में मछली लेकर प्रचार करना दिखावटी प्रयास है और भाजपा अब अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है।
Bengal Election Fish Politics : तृणमूल यह संदेश दे रही है कि वही बांग्लाभाषियों की पार्टी है और इसलिए उनकी खानपान की परंपराओं से उसका सीधा जुड़ाव है। उधर भाजपा का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस जानबूझकर डर का माहौल बना रही है। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि पश्चिम बंगाल में मछली या मांस पर किसी तरह के प्रतिबंध का कोई प्रस्ताव नहीं है और सत्तारूढ़ दल चुनाव को ‘मेन्यू कार्ड’ तक सीमित कर तुच्छ बना रहा है। कुल मिलाकर, बंगाल की राजनीति में इस बार मछली-भात सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। और मछली पर छिड़ी इस तकरार में जनता किसका करेगी बेड़ा पार ये देखने दिलचस्प होगा |
read more : Ratlam SNCU Newborn Care : डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने की रतलाम एसएनसीयू टीम के समर्पित प्रयास की सराहना

