BY: MOHIT JAIN
गुजरात के प्राणी बचाव और पुनर्वास केंद्र वंतारा (Vantara) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली विशेष जांच टीम (SIT) ने वंतारा को क्लीन चिट दे दी है।
सोमवार को न्यायमूर्ति पंकज मिथल और पी.बी. वराले की पीठ ने SIT की रिपोर्ट को रिकॉर्ड में शामिल किया। कोर्ट ने कहा कि प्राधिकारियों ने वंतारा में नियमों के पालन और प्रबंधन को लेकर संतोषजनक रिपोर्ट पेश की है।
कैसे हुई जांच की शुरुआत?
वंतारा से जुड़े मामले ने मीडिया और सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
- एनजीओ और वाइल्डलाइफ संगठनों ने आरोप लगाया कि इस केंद्र में पशु कल्याण के मानकों का पालन नहीं हो रहा।
- इन शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए चार सदस्यीय SIT का गठन किया।
- जांच का उद्देश्य था कि वंतारा में वन्यजीव संरक्षण कानून और अन्य नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं।
SIT की रिपोर्ट: क्या कहा कोर्ट ने?
SIT ने शुक्रवार को अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी। इसमें पूरी जांच के दस्तावेज़ और एक पेन ड्राइव भी शामिल थी।
- कोर्ट ने कहा कि यह रिपोर्ट केवल जांच का निष्कर्ष है, इसे किसी भी तरह से वंतारा की कार्यप्रणाली पर संदेह के रूप में न देखा जाए।
- सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि याचिकाओं में लगाए गए आरोप निराधार हैं और SIT की रिपोर्ट से यह साफ हो गया है।
किन बिंदुओं पर हुई थी जांच?
SIT को कई गंभीर बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया गया था, जिनमें शामिल थे:
- भारत और विदेश से हाथियों सहित अन्य जानवरों के आयात-निर्यात के नियम।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम और उसके तहत बने चिड़ियाघरों के नियमों का पालन।
- अंतरराष्ट्रीय समझौतों और जैव विविधता संरक्षण नियमों का अनुपालन।
- पशुओं के स्वास्थ्य, देखभाल, मृत्यु दर और पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़े आरोप।
- औद्योगिक क्षेत्र के पास केंद्र की स्थिति और निजी संग्रहालय बनाने के आरोपों की जांच।
वंतारा क्यों है खास?
वंतारा गुजरात में स्थित एक अत्याधुनिक एनिमल रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर है। यहां घायल या लुप्तप्राय प्रजातियों के जानवरों का संरक्षण और पुनर्वास किया जाता है। यह प्रोजेक्ट रिलायंस ग्रुप के अनंत अंबानी के नेतृत्व में शुरू किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की SIT की जांच रिपोर्ट के बाद वंतारा पर लगे सभी आरोप खारिज हो गए हैं। यह फैसला न केवल वंतारा की पारदर्शिता को साबित करता है, बल्कि भारत में वन्यजीव संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और तकनीकी प्रगति का भी उदाहरण है।





