BY: MOHIT JAIN
शास्त्रीय संगीत की दुनिया के दिग्गज और पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। गुरुवार देर रात उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने माइनर हार्ट अटैक की पुष्टि की।
वर्तमान में 89 वर्षीय पं. मिश्र BHU अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के ICU में भर्ती हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।
अचानक बिगड़ी तबीयत
- पं. मिश्र मिर्जापुर में अपनी बेटी प्रो. नम्रता मिश्र के आवास पर थे।
- सीने में दर्द की शिकायत पर उन्हें तुरंत रामकृष्ण मिशन अस्पताल ले जाया गया।
- डॉक्टरों की सलाह पर शनिवार आधी रात उन्हें BHU स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल शिफ्ट किया गया।
ICU में इलाज जारी
BHU के डायरेक्टर प्रो. एसएन संखवार की देखरेख में डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रही है।
- डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत स्थिर है।
- बेटी नम्रता मिश्र ने बताया कि शुगर लेवल और हीमोग्लोबिन की कमी के चलते उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी।
जनप्रतिनिधियों ने लिया हालचाल
पं. मिश्र की तबीयत की खबर मिलते ही कई जनप्रतिनिधि उन्हें देखने पहुंचे।
- MLC धर्मेंद्र राय और सुरेश सिंह ने देर रात अस्पताल जाकर हालचाल लिया।
- चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी BHU पहुंचकर उनकी स्थिति जानी।
छन्नूलाल मिश्र: संगीत का जीवन सफर
- जन्म: 3 अगस्त 1936, हरिहरपुर (आजमगढ़, उत्तर प्रदेश)
- शुरुआती शिक्षा: पिता बद्री प्रसाद मिश्र और उस्ताद गनी अली साहब से संगीत की बारीकियां सीखीं।
- संगीत विधाएं: खयाल, ठुमरी, दादरा, भजन, कजरी और चैती में महारथ।
- बिहार के मुजफ्फरपुर से शिक्षा के बाद 40 साल पहले वाराणसी आकर काशी को कर्मभूमि बनाया।
सम्मान और उपलब्धियां
- 2000: संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- 2010: पद्मभूषण
- 2014: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने
- 2020: पद्मविभूषण सम्मान
निजी जीवन की चुनौतियां
पं. मिश्र के जीवन में संगीत जितना उज्ज्वल रहा, निजी जीवन उतना ही संघर्षों से भरा रहा।
- पत्नी मनोरमा मिश्रा और बड़ी बेटी संगीता मिश्रा दोनों की 2021 में कोरोना से मौत हो गई।
- परिवार में प्रॉपर्टी विवाद के चलते वे पिछले कुछ वर्षों से मिर्जापुर में सबसे छोटी बेटी प्रो. नम्रता मिश्र के साथ रह रहे हैं।
यादगार गीत और लोकप्रियता
पं. छन्नूलाल मिश्र का गीत “खेले मसाने में होली” आज भी श्रोताओं की जुबां पर है। उन्होंने शास्त्रीय और लोक विधाओं को मिलाकर भारतीय संगीत को नई पहचान दी।





