भारत की ताकतवर सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस अब और उन्नत स्वरूप में दुनिया के सामने आने जा रही है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निर्यात को नई गति देने की बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, नई पीढ़ी की ब्रह्मोस-एनजी (Next Generation) मिसाइल साल 2026 तक टेस्टिंग चरण में पहुंच सकती है।
रूस भी दिखा रहा रुचि
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के डिप्टी सीईओ चिलुकोटी चंद्रशेखर के अनुसार, भारत और रूस मिलकर इस मिसाइल की लागत घटाने पर काम कर रहे हैं। इसके लिए उत्पादन इकाइयों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि रूस अपनी सेना के लिए भी ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने पर विचार कर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव
हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल ने अपनी सटीकता और विनाशकारी क्षमता का प्रदर्शन किया। इस ऑपरेशन ने न सिर्फ भारत की सैन्य ताकत को उजागर किया बल्कि रूस सहित कई देशों को इस मिसाइल में रुचि दिखाने के लिए प्रेरित किया।
वैश्विक डिमांड में इजाफा
- ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज और गति इसे दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों में से एक बनाती है।
- कई देशों ने इसके निर्यात में रुचि दिखाई है।
- नई पीढ़ी की ब्रह्मोस-एनजी हल्की, ज्यादा तेज और किफायती होगी।
- इसके शामिल होने से भारत के रक्षा निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
क्यों खास है ब्रह्मोस-NG?
- यह मौजूदा ब्रह्मोस की तुलना में आकार में छोटी होगी।
- विभिन्न प्लेटफॉर्म (जैसे विमान, जहाज और जमीन आधारित लॉन्चर) से आसानी से लॉन्च की जा सकेगी।
- कम लागत और आधुनिक तकनीक से लैस होगी।
ब्रह्मोस-एनजी का टेस्टिंग चरण न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया भर की सेनाओं के लिए एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है। रूस जैसी बड़ी सैन्य ताकत का इसमें रुचि दिखाना भारत के रक्षा उद्योग के बढ़ते प्रभाव और ब्रह्मोस की वैश्विक मांग का स्पष्ट संकेत है।





