BY: Vijay Nandan
नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा ने मीडिया से बात करते हुए अपनी नाराजगी और तंजभरे अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनसे पूछे गए सभी सवाल पुराने और दोहराए गए थे।
वाड्रा ने कहा, “कोई नया सवाल नहीं था। वही सवाल बार-बार पूछे जा रहे थे, जिनका जवाब मैं पहले भी दे चुका हूं। अगर कल सार्वजनिक अवकाश न होता, तो मुझे अपना जन्मदिन ईडी के दफ्तर में ही मनाना पड़ता।”

गौरतलब है कि वाड्रा पर विदेशी संपत्तियों से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जांच चल रही है। इसी सिलसिले में ED उन्हें पूछताछ के लिए बार-बार तलब कर रही है।
वाड्रा ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, “मुझे बार-बार बुलाया जा रहा है, जबकि मैं पहले ही दस्तावेज़ जमा करा चुका हूं। कानून का सम्मान करते हुए मैं हर बार जांच एजेंसी के सामने पेश होता हूं, लेकिन यह सिलसिला कब तक चलेगा?”
#WATCH | Delhi | After the ED's interrogation, Businessman Robert Vadra says, "…There was no new question, all the questions were repeated one. If tomorrow would not have been a public holiday, I would have to celebrate my birthday in the ED office…" https://t.co/R43Y59I8pd pic.twitter.com/WoiYJJrN8F
— ANI (@ANI) April 17, 2025
ED की रणनीति पर भी उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला अब केवल कानूनी नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक तौर पर भी संवेदनशील हो चुका है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है, और रॉबर्ट वाड्रा की बार-बार पूछताछ इसी क्रम का हिस्सा मानी जा रही है।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
कांग्रेस ने इस पूछताछ को ‘दबाव की राजनीति’ करार देते हुए सरकार पर हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि वाड्रा को बार-बार बुलाकर परेशान किया जा रहा है, जबकि जांच में कुछ नया सामने नहीं आया है।
अब देखना यह है कि ED अगला कदम क्या उठाती है और क्या वाड्रा को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा या नहीं।
मुख्य आरोप क्या हैं?
- विदेशी संपत्ति (खासतौर पर लंदन स्थित एक प्रॉपर्टी) को अवैध रूप से खरीदना।
- बेनामी लेनदेन के जरिए संपत्ति छुपाना।
- मनी लॉन्ड्रिंग – यानी काले धन को वैध दिखाने की कोशिश।
रॉबर्ट वाड्रा मनी लॉन्ड्रिंग केस – प्रमुख घटनाक्रम
2011-2012:
- रॉबर्ट वाड्रा के जमीन सौदों को लेकर हरियाणा और राजस्थान में सवाल उठने शुरू हुए।
- इन सौदों में कथित तौर पर सरकारी नियमों की अनदेखी और अवैध लाभ उठाने के आरोप लगे।
2014:
- नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इन सौदों की जांच को गति मिली।
- वाड्रा के खिलाफ विभिन्न एजेंसियों ने दस्तावेज खंगालने शुरू किए।
2015-2018:
- कई मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया कि वाड्रा ने लंदन में अवैध तरीके से संपत्तियां खरीदीं, जिनकी अनुमानित कीमत करोड़ों में है।
- इन संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में बेनामी लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिले।
2019:
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वाड्रा के खिलाफ आधिकारिक रूप से जांच शुरू की।
- वाड्रा को पहली बार पूछताछ के लिए समन भेजा गया।
- 6 फरवरी 2019 को वाड्रा पहली बार ईडी के सामने पेश हुए।
- पूछताछ की कई राउंड हुए, और उनसे विदेशों में संपत्तियों की जानकारी मांगी गई।
2020-2023:
- जांच धीमी हुई, लेकिन मामला बंद नहीं किया गया।
- अदालत में केस की स्थिति बनी रही और वाड्रा को नियमित रूप से अंतरिम राहत मिलती रही।
2024-2025:
- लोकसभा चुनावों के बाद ईडी ने फिर से पूछताछ तेज़ कर दी है।
- हाल ही में (अप्रैल 2025) वाड्रा से फिर कई घंटे की पूछताछ हुई।
- वाड्रा का आरोप है कि “पूछताछ में कोई नया सवाल नहीं था, सिर्फ वही पुराने सवाल बार-बार पूछे जा रहे हैं।”





