ABVP SIR Round Table Conference : गोरखपुर, 23 अक्टूबर 2026। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देशभर में जारी चर्चा के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के आयाम शोध कार्य के तत्वावधान में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में एक दिवसीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कमेटी हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों और शोधार्थियों ने निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
दो सत्रों में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा और विधि क्षेत्र से जुड़े वक्ताओं के साथ ABVP के पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की सटीकता और संवैधानिक प्रावधानों की समझ आवश्यक है। साथ ही, SIR जैसे विषयों पर चर्चा तथ्यों, तर्कों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप किए जाने पर जोर दिया गया।
ABVP SIR Round Table Conference : गोरखपुर विश्वविद्यालय में दो सत्रों में आयोजित हुई कॉन्फ्रेंस
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर आयोजित इस राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. एस. पी. एम. त्रिपाठी, विधि विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शैलेश सिंह और ABVP गोरक्ष प्रांत के प्रांत अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह उपस्थित रहे। प्रथम सत्र का संचालन ABVP गोरखपुर महानगर के उपाध्यक्ष डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह ने किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र SIR की प्रक्रिया, इसके उद्देश्य, मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की आवश्यकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग की भूमिका रही।
ABVP SIR Round Table Conference : SIR पर तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर चर्चा जरूरी: प्रो. एस. पी. एम. त्रिपाठी
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. एस. पी. एम. त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान समय में देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विचार-विमर्श होना स्वाभाविक है, लेकिन इस विषय पर चर्चा तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की प्रमुख जिम्मेदारी स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार का विशेष महत्व है। लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सहभागिता, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और जनप्रतिनिधियों के चयन की निष्पक्ष प्रक्रिया पर आधारित है।
प्रो. त्रिपाठी ने मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि SIR की प्रक्रिया, उसके उद्देश्यों और विभिन्न चरणों को समग्रता से समझना जरूरी है। किसी भी प्रक्रिया के बारे में राय बनाने से पहले उससे जुड़े तथ्यों का अध्ययन किया जाना चाहिए।
ABVP SIR Round Table Conference : मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के अधिकारों पर डॉ. शैलेश सिंह ने रखे विचार
विधि विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शैलेश सिंह ने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया का मूल उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम शामिल होना और अपात्र प्रविष्टियों को नियमानुसार हटाया जाना आवश्यक है। उनके अनुसार, SIR को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय संवैधानिक प्रावधानों और निर्वाचन व्यवस्था के व्यापक हितों के संदर्भ में समझना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने और आवश्यक दस्तावेजों के माध्यम से अपनी पात्रता सुनिश्चित करने का अवसर मिलना चाहिए।
ABVP SIR Round Table Conference : दूसरे सत्र में आशीष चौहान ने लोकतांत्रिक विमर्श और संवैधानिक मर्यादाओं पर दिया जोर
कॉन्फ्रेंस के दूसरे सत्र का शुभारंभ ABVP के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री आशीष चौहान, बुद्धा पी.जी. कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र मिश्रा और ABVP गोरक्ष प्रांत के प्रांत अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह की उपस्थिति में हुआ। इस सत्र का संचालन ABVP गोरक्ष प्रांत के उपाध्यक्ष डॉ. निगम मौर्य ने किया।
राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने विशेष गहन पुनरीक्षण और भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची की शुद्धता और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र के महत्वपूर्ण आधार हैं।
उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर समय-समय पर उठने वाले सवालों के संदर्भ में कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों, प्रमाणों और वास्तविक परिस्थितियों का समुचित अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम किसी दल की अपेक्षाओं के अनुरूप न होने मात्र से पूरी निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है। लोकतांत्रिक विमर्श में आरोपों के साथ प्रमाण और तर्क भी महत्वपूर्ण हैं।
ABVP SIR Round Table Conference : मताधिकार की सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को बताया महत्वपूर्ण
आशीष चौहान ने कहा कि SIR पर चर्चा के दौरान प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार का संरक्षण सर्वोपरि होना चाहिए। साथ ही, मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के प्रयासों को तथ्यों तथा संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर होने वाली चर्चा में नागरिकों के अधिकार, निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही केंद्र में रहनी चाहिए। लोकतंत्र केवल सत्ता परिवर्तन की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत मर्यादाओं और नागरिकों की सक्रिय सहभागिता पर आधारित व्यापक व्यवस्था है।
उन्होंने लोकतांत्रिक विमर्श में असहमति, आलोचना और वैचारिक बहस के महत्व को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, इन सभी का स्वागत होना चाहिए, लेकिन चर्चा का आधार तथ्य, तर्क और संवैधानिक मर्यादाएं होनी चाहिए। उन्होंने मीडिया और सार्वजनिक विमर्श से जुड़े पक्षों से भी किसी विषय को प्रस्तुत करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने और जिम्मेदार संवाद को बढ़ावा देने की अपेक्षा जताई।
ABVP SIR Round Table Conference : SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी: डॉ. जितेंद्र मिश्रा
बुद्धा पी.जी. कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र मिश्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इसे केवल निर्वाचन आयोग द्वारा संपन्न कराई जाने वाली प्रक्रिया के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। इसके प्रत्येक चरण में पारदर्शिता, सत्यापन और जवाबदेही के पहलुओं को समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बूथ स्तर पर होने वाली गतिविधियों से लेकर मीडिया की भूमिका और उसके दायित्वों तक, सभी विषयों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति और आलोचना के लिए पर्याप्त स्थान है, लेकिन यह संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तथ्यपरक संवाद, संवैधानिक प्रक्रियाओं के प्रति विश्वास और जिम्मेदार नागरिक सहभागिता में निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अराजकता का कोई स्थान नहीं है।
ABVP SIR Round Table Conference : शोधार्थियों ने SIR की संवैधानिक वैधता और मतदाता अधिकारों पर पूछे सवाल
कॉन्फ्रेंस के दोनों सत्रों में शोधार्थियों ने वक्ताओं से SIR से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण सवाल पूछे। इनमें विशेष गहन पुनरीक्षण की संवैधानिक वैधता, इसकी प्रक्रिया, मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा और निर्वाचन आयोग की भूमिका जैसे विषय शामिल रहे।
वक्ताओं ने शोधार्थियों की जिज्ञासाओं का उत्तर तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में दिया। इस संवादात्मक सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को SIR के उद्देश्यों, प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता को समझने का अवसर मिला।
ABVP SIR Round Table Conference : ABVP के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे उपस्थित
इस कार्यक्रम में ABVP पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री घनश्याम शाही, क्षेत्रीय छात्रा प्रमुख प्रो. सुषमा पांडेय, प्रो. विनय सिंह और ABVP गोरक्ष प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री श्री पुनीत अग्रवाल सहित संगठन के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर शैक्षणिक और वैचारिक विमर्श को आगे बढ़ाना रहा। वक्ताओं ने मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र नागरिकों के अधिकारों, निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया।
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