UP Land Records Digitization: सपा सरकार में छह साल के रोस्टर पर निर्भर थी खतौनी
UP Land Records Digitization: उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार ने राजस्व विभाग की सेवाओं के डिजिटलीकरण पर जोर दिया है। प्रदेश में रियल टाइम खतौनी व्यवस्था का 99.86 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही ऑनलाइन वरासत, डिजिटल भू-नक्शे और जमीन के हिस्से के निर्धारण जैसे कार्यों में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
राजस्व विभाग के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान खतौनी तैयार करने की प्रक्रिया छह साल के रोस्टर पर निर्भर थी। वहीं, अब रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू होने से भूमि अभिलेखों को अपडेट रखने की दिशा में बदलाव आया है।
पहले राजस्व विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए लोगों को ऑफलाइन प्रक्रियाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। वरासत दर्ज कराने और खसरा तैयार करने जैसे कार्यों में पारंपरिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल होता था। भूमि अभिलेखों में बदलाव और उन्हें अपडेट कराने के लिए नागरिकों को समय और मेहनत खर्च करनी पड़ती थी। साथ ही, भू-नक्शों की ऑनलाइन उपलब्धता भी सीमित थी। योगी सरकार ने इन व्यवस्थाओं को तकनीक आधारित बनाने को प्राथमिकता दी है।
UP Land Records Digitization: खतौनी में तकनीक से रिकॉर्ड के सत्यापन में आसानी
राजस्व विभाग ने रियल टाइम खतौनी व्यवस्था के साथ क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर वाली खतौनी तैयार करने की पहल भी की है। इससे भूमि संबंधी दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचने और रिकॉर्ड का सत्यापन करने में मदद मिल सकती है।
पुरानी व्यवस्था में खतौनी तैयार करने के लिए छह साल के रोस्टर पर निर्भरता थी। इसके मुकाबले रियल टाइम व्यवस्था का उद्देश्य भूमि अभिलेखों को अधिक अद्यतन रखना और राजस्व सेवाओं को तकनीक के जरिए आसान बनाना है।
UP Land Records Digitization: 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज
भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है। राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक प्रदेश में 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं।
पहले वरासत दर्ज कराने के लिए लोगों को ऑफलाइन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इस दौरान समय अधिक लगने और प्रक्रिया में अनिश्चितता की शिकायतें भी सामने आती थीं। ऑनलाइन सुविधा शुरू होने से इस प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से पूरा करने की व्यवस्था विकसित हुई है।
UP Land Records Digitization: 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण का काम पूरा
उत्तर प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए अंश निर्धारण के कार्य में भी तेजी लाई गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण का काम पूरा हो चुका है।
इसके अलावा उपलब्ध भू-नक्शों और शजरों यानी विस्तृत भू-नक्शों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण किया जा चुका है। वहीं, 98 प्रतिशत भू-नक्शों को खतौनी से लिंक कर दिया गया है। इससे जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और उसके नक्शे के बीच डिजिटल संबंध स्थापित करने में मदद मिली है।
UP Land Records Digitization: ई-खसरा पड़ताल ऐप से डिजिटल खसरा तैयार करने की व्यवस्था
राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण के तहत वर्ष 2021 से ई-खसरा पड़ताल ऐप के माध्यम से डिजिटल खसरा तैयार करने का काम भी किया जा रहा है। इस व्यवस्था के जरिए खेतों से संबंधित विवरण को डिजिटल रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया विकसित की गई है।
राजस्व विभाग की इन पहलों का उद्देश्य भूमि अभिलेखों को तकनीक के माध्यम से अधिक व्यवस्थित बनाना और पारंपरिक ऑफलाइन प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम करना है। रियल टाइम खतौनी, ऑनलाइन वरासत, डिजिटल भू-नक्शे और ई-खसरा पड़ताल जैसी व्यवस्थाएं उत्तर प्रदेश में राजस्व सेवाओं को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
READ MORE : Simhastha 2028 Preparations: सिंहस्थ-2028 के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश, व्यापारियों के लिए बनेंगे वैकल्पिक बाजार


