by: vijay yadav
Health Tests After 50 : इंसान की उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव होने लगते हैं। ऐसे में केवल परेशानी होने पर डॉक्टर के पास जाना पर्याप्त नहीं है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, आंखों की समस्याएं और कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम उम्र के साथ बढ़ सकता है। कई बीमारियां शुरुआती दौर में स्पष्ट लक्षण भी नहीं दिखातीं। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच यानी हेल्थ स्क्रीनिंग से बीमारियों की पहचान समय रहते करने और गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन क्या 50 साल की उम्र पूरी होते ही सभी तरह के टेस्ट कराना जरूरी है? इसका जवाब है, नहीं। जांच का चुनाव व्यक्ति की उम्र, लिंग, पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली और पहले से मौजूद बीमारियों के आधार पर करना चाहिए।
Health Tests After 50 : ब्लड प्रेशर की जांच
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों को इसका पता तब तक नहीं चलता, जब तक कोई गंभीर समस्या सामने न आए। लंबे समय तक रक्तचाप बढ़ा रहने से दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
50 की उम्र के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए। यदि रीडिंग सामान्य है, तो जांच कितनी बार करनी है, यह डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करें। बार-बार उच्च रीडिंग आने पर चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।

Health Tests After 50 : ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट
डायबिटीज का जोखिम उम्र बढ़ने, वजन अधिक होने, शारीरिक गतिविधि कम होने और परिवार में मधुमेह का इतिहास होने पर बढ़ सकता है। इसके लिए फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज या HbA1c टेस्ट कराया जा सकता है।
HbA1c जांच पिछले लगभग तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर का अनुमान देती है। यदि रिपोर्ट सामान्य है, तो अगली जांच का समय जोखिम के आधार पर तय किया जाता है। प्रीडायबिटीज या डायबिटीज मिलने पर डॉक्टर नियमित निगरानी की सलाह दे सकते हैं।
Health Tests After 50 : कोलेस्ट्रॉल और लिपिड प्रोफाइल
खून में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ने से धमनियों में रुकावट और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। लिपिड प्रोफाइल से कोलेस्ट्रॉल के विभिन्न स्तरों की जानकारी मिलती है।
इस जांच के आधार पर डॉक्टर रक्तचाप, धूम्रपान, डायबिटीज और अन्य जोखिमों के साथ हृदय रोग की आशंका का आकलन कर सकते हैं। जांच की आवृत्ति आपकी रिपोर्ट और समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।
Health Tests After 50 : किडनी और लिवर की जांच
किडनी की बीमारी शुरुआती चरणों में बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है। खासकर डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह पर सीरम क्रिएटिनिन, eGFR और यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेशियो (UACR) जैसी जांचों की जरूरत हो सकती है।
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक निश्चित अंतराल पर अनिवार्य स्क्रीनिंग नहीं है। शराब का सेवन, मोटापा, कुछ दवाएं, लिवर संबंधी लक्षण या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं।
Health Tests After 50 : आंखों और सुनने की क्षमता की जांच
उम्र के साथ मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिना संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए नियमित नेत्र परीक्षण कराना उपयोगी है। डायबिटीज होने पर आंखों के पर्दे की जांच भी महत्वपूर्ण है।
यदि टीवी की आवाज तेज करनी पड़ती है, बातचीत समझने में परेशानी होती है या कानों में लगातार आवाज आती है, तो सुनने की क्षमता की जांच कराएं।
Health Tests After 50 : कैंसर की स्क्रीनिंग को न करें नजरअंदाज
50 की उम्र के बाद कुछ कैंसर की स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
कोलोरेक्टल कैंसर, औसत जोखिम वाले लोगों में कई दिशानिर्देश 45 वर्ष से स्क्रीनिंग शुरू करने की सलाह देते हैं। स्टूल टेस्ट या कोलोनोस्कोपी जैसे विकल्प डॉक्टर से समझें।
स्तन कैंसर: महिलाओं में मैमोग्राफी की जरूरत और अंतराल उम्र तथा व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर तय होता है।
सर्वाइकल कैंसर: जिन महिलाओं की सर्वाइकल स्क्रीनिंग लागू होती है, उन्हें निर्धारित उम्र और अंतराल के अनुसार HPV टेस्ट या अन्य अनुशंसित जांच करानी चाहिए।
प्रोस्टेट कैंसर: पुरुषों में PSA टेस्ट कराने का निर्णय संभावित लाभ, जोखिम और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर डॉक्टर से चर्चा के बाद लेना चाहिए।
किसी कैंसर का पारिवारिक इतिहास या असामान्य लक्षण होने पर स्क्रीनिंग की योजना अलग हो सकती है।
Health Tests After 50 : हड्डियों, थायरॉयड और विटामिन की जांच
महिलाओं में मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ सकता है। हड्डियों की मजबूती जानने के लिए बोन मिनरल डेंसिटी यानी DEXA स्कैन की सलाह दी जा सकती है। पुरुषों में भी उम्र और अन्य जोखिमों के आधार पर इसकी जरूरत पड़ सकती है।
थायरॉयड, विटामिन B12 और विटामिन D की जांच हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए नियमित रूप से जरूरी नहीं है। थकान, कमजोरी, हड्डियों में दर्द, कुछ दवाओं का सेवन या अन्य जोखिम होने पर डॉक्टर इनकी सलाह दे सकते हैं।
Health Tests After 50 : टीकाकरण और स्वास्थ्य समीक्षा भी जरूरी
50 के बाद केवल खून की जांच ही नहीं, बल्कि टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा भी करें। फ्लू, कोविड-19, शिंगल्स, न्यूमोकोकल और टिटनेस जैसे टीकों की जरूरत उम्र, पिछली खुराकों, उपलब्ध दिशानिर्देशों और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय होती है। इसके अलावा वजन, कमर का घेरा, दांतों का स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, नींद और शारीरिक सक्रियता पर भी ध्यान दें।
50 साल की उम्र के बाद स्वस्थ रहने के लिए हर महीने महंगे पैकेज वाले टेस्ट कराना जरूरी नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि डॉक्टर से व्यक्तिगत हेल्थ स्क्रीनिंग प्लान बनवाएं। ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और उम्र के अनुसार कैंसर स्क्रीनिंग जैसी जरूरी जांचों को प्राथमिकता दें। याद रखिए, सीने में दर्द, अचानक सांस फूलना, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, अचानक नजर कम होना या मल-मूत्र में खून जैसे लक्षणों को नियमित चेकअप तक टालें नहीं। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें।


