Tribal Welfare in MP के लिए बढ़ाया गया जनजातीय विकास का बजट
मध्यप्रदेश की जनजातीय संस्कृति प्रदेश की पहचान और समृद्ध विरासत का अहम हिस्सा है। जनजातीय परंपराओं, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ जनजातीय समाज के सामाजिक और आर्थिक उत्थान पर भी सरकार का फोकस है। शिक्षा से लेकर आवास तक, रोजगार से लेकर आर्थिक सशक्तिकरण तक, जनजातीय वर्ग के लिए कई स्तरों पर योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जनजातीय कल्याण और विकास को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। जनजातीय कल्याण और विकास योजनाओं के बजट को बढ़ाकर लगभग 47 हजार 295 करोड़ रुपये से 47 हजार 425 करोड़ रुपये किया गया है। सरकार का लक्ष्य बुनियादी सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार करना है।
Tribal Welfare in MP में सामाजिक-आर्थिक उत्थान पर सरकार का फोकस
सरकार की जनजातीय कल्याण नीति केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास के आधुनिक अवसरों से जोड़ने के साथ उनकी अस्मिता, संस्कृति, अधिकारों और परंपराओं को सुरक्षित रखना भी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि प्रकृति पूजक जनजातीय समुदाय प्रदेश की धरोहर हैं। वनों की सुरक्षा, उनके संवर्धन और प्रबंधन में जनजातीय समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में जनजातीय समाज को उनका अधिकार दिलाने, उनकी मेहनत का सम्मान सुनिश्चित करने और उनके हितों की सुरक्षा को सरकार अपने संकल्प का हिस्सा मानती है।
Tribal Welfare in MP में जनजातीय गौरव और संस्कृति संरक्षण पर जोर
मध्यप्रदेश की जनजातीय पहचान सदियों पुरानी परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है। नर्मदा के अंचलों से लेकर सतपुड़ा, विंध्य और प्रदेश के वनांचलों तक जनजातीय समुदायों ने प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की जीवन-पद्धति विकसित की है। इसमें लोकज्ञान, लोककला, संगीत, नृत्य, वेशभूषा, भाषा और सामुदायिक परंपराओं की समृद्ध विरासत दिखाई देती है।
सरकार की ओर से जनजातीय परंपराओं, लोककला, लोकसंस्कृति और पारंपरिक जीवन-पद्धति को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय कला, भोजन, हस्तशिल्प और परंपराओं को रोजगार और पर्यटन से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि संस्कृति का संरक्षण होने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आय के अवसर भी बढ़ें।
Tribal Welfare in MP में जनजातीय कलाओं को मिल रही नई पहचान
जनजातीय कला और शिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। डिंडोरी जिले की गोंड पेंटिंग को GI टैग प्राप्त हुआ है, जबकि अन्य जनजातीय उत्पादों को भी GI टैग दिलाने की प्रक्रिया चल रही है।
इसमें भील जनजाति की गलशन माला, बोलनी, पिथौरा चित्रशैली, झाबुआ की आदिवासी गुड़िया और गोंड जनजाति समूह के पारंपरिक वाद्य यंत्र, बाना चिकारा तथा मुखौटा काष्ठ शिल्प जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन पारंपरिक कलाओं को बाजार और पर्यटन से जोड़ने का प्रयास जनजातीय कलाकारों और शिल्पकारों के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है।
Tribal Welfare in MP के लिए आदि वाणी एप की पहल
जनजातीय भाषाओं और स्थानीय बोली को संरक्षित करने के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत सरकार और IIT दिल्ली के सहयोग से भीली बोली के लिए ‘आदि वाणी’ एप तैयार किया गया है। इसमें भीली से हिन्दी और हिन्दी से भीली अनुवाद की सुविधा उपलब्ध है।
यह पहल जनजातीय भाषा को डिजिटल माध्यम से नई पीढ़ी और व्यापक समाज तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे स्थानीय बोली और भाषाई विरासत के संरक्षण के साथ सरकारी और शैक्षणिक जानकारी तक पहुंच को भी आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
Tribal Welfare in MP में PM JANMAN से विशेष रूप से कमजोर जनजातियों पर फोकस
बैगा, भारिया और सहरिया जैसी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
PM जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान यानी PM JANMAN के माध्यम से अत्यंत पिछड़ी जनजातियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान के तहत 9 मंत्रालयों की 11 अधोसंरचनात्मक और 7 हितग्राही मूलक योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
पिछले दो वर्षों में 10,99,125 आधार कार्ड, 5,96,931 जनधन बैंक खाते, 7,23,236 आयुष्मान भारत कार्ड, 10,01,220 जाति प्रमाण पत्र, 59,455 किसान क्रेडिट कार्ड, 88,899 पीएम किसान सम्मान निधि और 3,01,964 राशन कार्ड बनाए गए हैं।
Tribal Welfare in MP में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
जनजातीय बस्तियों में सड़क, पुलिया, नाली, बिजली, पेयजल और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए भी योजनाएं संचालित हैं। सरकार का उद्देश्य दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक विकास की बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।
जनजातीय बसाहट क्षेत्रों में करीब 1800 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों के कायाकल्प का काम किया जा रहा है। करीब 1295 बसाहट क्षेत्रों में लगभग 1100 किलोमीटर सड़कों को स्वीकृति दी गई है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन बेहतर होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
Tribal Welfare in MP में धरती आबा अभियान से गांवों का विकास
जनजातीय क्षेत्रों में समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान भी महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
जनजातीय क्षेत्रों में कौशल विकास, स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर आय के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। रोजगार और आर्थिक सहायता के लिए मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति विशेष परियोजना वित्त पोषण योजना संचालित की जा रही है।
Tribal Welfare in MP में आदि कर्मयोगी अभियान की भूमिका
जनजातीय क्षेत्रों में योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने के लिए आदि कर्मयोगी अभियान पर भी जोर दिया गया है। विकसित मध्यप्रदेश के लिए 3 लाख प्रतिबद्ध लीडर—आदि कर्मयोगी, आदि साथी और आदि महायोगी तैयार किए गए हैं।
13,390 विलेज एक्शन प्लान तैयार कर भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं और 13,254 आदि सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। मध्यप्रदेश को आदि कर्मयोगी अभियान के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है।
Tribal Welfare in MP में जनजातीय पर्यटन से रोजगार के अवसर
जनजातीय संस्कृति को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। स्वदेशी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 14 गांवों में 86 जनजातीय होम-स्टे बनाए जा रहे हैं। नर्मदा परिक्रमा मार्ग के जनजातीय गांवों में भी होम-स्टे, स्थानीय कला, भोजन और संस्कृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है।
जनजातीय क्षेत्रों में 346 होम-स्टे आय का साधन बन रहे हैं। इनके संचालकों ने अब तक 6.76 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। इस तरह पर्यटन को स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
Tribal Welfare in MP में जनजातीय महिलाओं के लिए रोजगार की पहल
जनजातीय महिलाओं को रोजगार और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। गुजरात के केवड़िया में संचालित जनजातीय महिला कैफेटेरिया की तर्ज पर पचमढ़ी, मांडू, कान्हा-किसली, पेंच और बांधवगढ़ में कैफेटेरिया का निर्माण किया जा रहा है।
इन कैफेटेरिया का संचालन जनजातीय स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा किया जाएगा। इससे महिलाओं को आजीविका का साधन मिलने के साथ स्थानीय भोजन, कला और जनजातीय संस्कृति को पर्यटकों तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा।
Tribal Welfare in MP में पोषण और महिला सशक्तिकरण पर ध्यान
विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया परिवारों की महिला मुखिया को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य कमजोर जनजातीय परिवारों में पोषण की स्थिति को बेहतर करना है।
विभागीय योजनाओं की जानकारी सरलता से उपलब्ध कराने के लिए शालिनी एप भी विकसित किया गया है। इससे जनजातीय वर्ग से जुड़े लोगों को योजनाओं और सरकारी सुविधाओं की जानकारी तक आसानी से पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
Tribal Welfare in MP में शिक्षा और छात्रवृत्ति पर विशेष फोकस
जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 11वीं, 12वीं और महाविद्यालयीन शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित हैं। कक्षा 1 से 12वीं तक स्कूली शिक्षा और महाविद्यालयीन शिक्षा के लिए छात्रावास एवं आवास सहायता की व्यवस्था भी की गई है।
छात्रावासों में विद्यार्थियों को निःशुल्क आवासीय भवन, बिजली-पानी, भोजन, फर्नीचर, बिस्तर सामग्री, पुस्तकालय और कोचिंग सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। उच्च शिक्षा के लिए भी छात्रावास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
Tribal Welfare in MP में छात्रावास और उच्च शिक्षा की सुविधा
महाविद्यालयीन एवं उच्च स्तर की शिक्षा के लिए संभाग स्तर पर 2,000 रुपये प्रतिमाह, जिला स्तर पर 1,250 रुपये प्रतिमाह और विकासखंड/तहसील स्तर मुख्यालय पर 1,000 रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है।
जनजातीय छात्रावासों एवं आश्रमों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भी छात्रवृत्ति की व्यवस्था है। बालक विद्यार्थियों को 1,720 रुपये प्रतिमाह और बालिका विद्यार्थियों को 1,770 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।
Tribal Welfare in MP में बालिका शिक्षा को बढ़ावा
अनुसूचित जनजाति वर्ग की बालिकाओं में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने और उन्हें आगे की कक्षाओं में शिक्षा जारी रखने के लिए कन्या साक्षरता प्रोत्साहन योजना संचालित है।
इसके अलावा अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को विदेश स्थित मान्यता प्राप्त संस्थानों में उच्च शिक्षा के अवसर देने के लिए प्रतिवर्ष 50 छात्र-छात्राओं को विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। इससे प्रतिभाशाली जनजातीय विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
Tribal Welfare in MP में रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण
जनजातीय समाज के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जनजातीय वर्ग के व्यवसायियों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 4 ट्राइबल मल्टीपर्पज मार्केटिंग सेंटर स्वीकृत किए गए हैं।
स्थानीय कला, हस्तशिल्प और जनजातीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की कोशिश के साथ कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य जनजातीय परिवारों की पारंपरिक क्षमताओं को आय के स्थायी साधनों में बदलना है।
Tribal Welfare in MP में जनजातीय इतिहास और नायकों का सम्मान
जनजातीय विकास के साथ उनकी ऐतिहासिक विरासत और नायकों के सम्मान को भी सरकार की नीति में स्थान दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय नायकों के शौर्य और पराक्रम का स्मरण करते हुए उनके मान-सम्मान के लिए प्रयासों पर जोर दिया है।
राजा भभूत सिंह और अन्य जनजातीय नायकों से जुड़े स्थलों पर मंत्रि-परिषद की बैठक जैसे कदमों को जनजातीय वीरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता से जोड़कर देखा गया है। इसी तरह जनजातीय इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण पर भी काम किया जा रहा है।
Tribal Welfare in MP में टंट्या मामा की विरासत को शिक्षा से जोड़ने की पहल
जनजातीय गौरव और विकास को साथ लेकर चलने की दिशा में क्रांतिसूर्य टंट्या मामा की विरासत को उच्च शिक्षा से जोड़ने की पहल भी उल्लेखनीय है। खरगोन में टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है।
जनजातीय नायक की स्मृति को उच्च शिक्षा के संस्थान से जोड़ने का उद्देश्य नई पीढ़ी को जनजातीय इतिहास और विरासत से जोड़ने का माध्यम तैयार करना है। इससे शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा बनती है।
Tribal Welfare in MP में ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण
जनजातीय इतिहास और विरासत के संरक्षण की कड़ी में मंडला के ऐतिहासिक स्थलों का विकास भी महत्वपूर्ण है। राजा शंकर शाह, कुंवर रघुनाथ शाह और राजा हृदय शाह से जुड़े प्राचीन किले के जीर्णोद्धार के लिए 15 करोड़ रुपये की घोषणा की गई है।
ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण केवल पुराने भवनों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है। इनके जरिए जनजातीय समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान की ऐतिहासिक स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जा रहा है।
Tribal Welfare in MP में कला, संस्कृति और आजीविका को एक साथ जोड़ने की कोशिश
जनजातीय संस्कृति का संरक्षण केवल स्मारकों या आयोजनों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। संस्कृति तब अधिक प्रभावी रूप से संरक्षित रहती है, जब वह नई पीढ़ी की शिक्षा, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों से जुड़ी हो।
मई 2025 में आयोजित राज्य स्तरीय आदि शिल्पग्राम महोत्सव में जनजातीय शिल्प, चित्रकला और कलाकारों को प्रदर्शन तथा बाजार उपलब्ध कराने के लिए मंच देने पर जोर दिया गया था। गोंड चित्रकला के GI टैग का उल्लेख करते हुए जनजातीय कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की आवश्यकता भी सामने रखी गई।
Tribal Welfare in MP में पारंपरिक कला को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल
खंडवा जिले के खालवा में जनजातीय कला, संस्कृति, बोली, रहन-सहन, वेशभूषा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के प्रशिक्षण से जुड़े ट्राइबल हॉस्टल की पहल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।
ऐसी पहल का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति को केवल अतीत की स्मृति बनाकर रखने के बजाय उसे सीखने, समझने और आगे बढ़ाने की जीवंत प्रक्रिया से जोड़ना है। इससे युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ते हुए आधुनिक अवसरों का लाभ उठा सकती है।
Tribal Welfare in MP में PESA और स्थानीय भागीदारी पर जोर
जनजातीय क्षेत्रों के टिकाऊ विकास में ग्रामसभा और स्थानीय भागीदारी की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसी कारण PESA कानून और वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है।
जनवरी 2025 की सरकारी जानकारी के अनुसार पात्र हितग्राहियों को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की योजनाओं का लाभ दिलाने और PESA से जुड़े दावों के समयबद्ध निराकरण पर ध्यान दिया गया है। स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
Tribal Welfare in MP में आंगनवाड़ी और पोषण सेवाओं का विस्तार
जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों और माताओं तक पोषण तथा प्रारंभिक बाल विकास सेवाओं की पहुंच मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। PM-JANMAN के अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों वाले 23 जिलों में 194 नए आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना और संचालन को मंजूरी दी गई है।
इन केंद्रों के संचालन के लिए 15.70 करोड़ रुपये के व्यय भार को स्वीकृति दी गई है। जनजातीय परिवेश को ध्यान में रखते हुए इन केंद्रों के भवन निर्माण का भी प्रावधान किया गया है।
Tribal Welfare in MP में श्री अन्न और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
जनजातीय क्षेत्रों में कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए श्री अन्न यानी मोटे अनाज की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना के माध्यम से जनजातीय बहुल क्षेत्रों में मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
श्री अन्न को कृषि, पोषण और स्थानीय बाजार से जोड़ने से जनजातीय किसानों के लिए आय के अवसर बढ़ाने की संभावना है। इसके साथ मृदा स्वास्थ्य, फसल बीमा, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने से जुड़ी पहलों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
Tribal Welfare in MP में वनोपज और पारंपरिक ज्ञान को आर्थिक अवसर से जोड़ने का प्रयास
जनजातीय अर्थव्यवस्था में वन और वनोपज की महत्वपूर्ण भूमिका है। पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ने के लिए जनजातीय चित्रकला, हस्तशिल्प और वनोपज को बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
तेंदूपत्ता जैसे वन उत्पादों के बेहतर स्थानीय उपयोग और जनजातीय समुदायों को अधिक लाभ दिलाने की दिशा में भी रणनीति बनाने पर जोर दिया गया है। इससे पारंपरिक संसाधनों को स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने में मदद मिल सकती है।
Tribal Welfare in MP में गौरव, संरक्षण और कल्याण को साथ लेकर चलने की नीति
मध्यप्रदेश में जनजातीय कल्याण की पूरी दिशा को देखें तो इसके तीन प्रमुख आयाम सामने आते हैं—गौरव, संरक्षण और कल्याण। गौरव का अर्थ जनजातीय नायकों, इतिहास और बलिदान को सम्मान देना है। संरक्षण का अर्थ भाषा, कला, संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।
वहीं कल्याण के तहत शिक्षा, छात्रवृत्ति, पोषण, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, बिजली, आजीविका और अधिकारों से जुड़ी योजनाओं को जनजातीय परिवारों तक पहुंचाने पर जोर है। सरकार की कोशिश है कि विकास की प्रक्रिया जनजातीय समाज की पहचान और परंपराओं के सम्मान के साथ आगे बढ़े।
Tribal Welfare in MP में अपनी जड़ों के साथ भविष्य के अवसरों पर फोकस
जनजातीय समाज का वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है, जब विकास उसकी पहचान और परंपराओं के सम्मान के साथ आगे बढ़े। मध्यप्रदेश में जनजातीय नायकों की स्मृति को शिक्षा से जोड़ने, ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण करने, विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और छात्रवृत्ति के अवसर बढ़ाने, PVTG समुदायों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने और स्थानीय कला एवं वनोपज को आजीविका से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में अपनी जड़ों पर गर्व और भविष्य के लिए नए अवसर दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश दिखाई देती है। जनजातीय समाज के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार जहां विकास की जरूरत है, वहीं भाषा, कला, संस्कृति, इतिहास और परंपराओं का संरक्षण उनकी पहचान को मजबूत करने के लिए जरूरी है। यही संतुलन मध्यप्रदेश में जनजातीय गौरव और जनकल्याण को एक साथ आगे बढ़ाने की दिशा तय करता है।
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