Cancer Homoeopathy Book Launch में ‘कैंसर में होम्योपैथी’ पुस्तक का विमोचन
इंदौर के वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. ए.के. द्विवेदी की पुस्तक ‘कैंसर में होम्योपैथी : Supportive & Palliative Cancer Care’ का गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू, मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत और केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीपाद येसो नाईक की मौजूदगी में हुआ। कार्यक्रम में कैंसर के प्रति जागरूकता, चिकित्सा और मरीजों की बेहतर जीवन-गुणवत्ता से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
Cancer Homoeopathy Book Launch के साथ 17वीं Palliative Cancer Conference आयोजित
पुस्तक विमोचन के साथ 17वीं Palliative Cancer Conference का भी आयोजन किया गया। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से आए चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने कैंसर की रोकथाम, उपचार, supportive care, palliative care और मरीजों की quality of life से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में कैंसर मरीजों की बीमारी के साथ-साथ उनके शारीरिक और भावनात्मक सहयोग की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
Cancer Homoeopathy Book Launch में डॉ. ए.के. द्विवेदी ने दिया व्याख्यान
सम्मेलन में डॉ. ए.के. द्विवेदी ने “Palliative and Supportive Care through Homoeopathy in Various Cancers” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कैंसर के एक मरीज का clinical case भी प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कैंसर के उपचार के साथ मरीज के दर्द, कमजोरी, मानसिक तनाव, नींद, भूख और अन्य लक्षणों के प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
Cancer Homoeopathy Book Launch में advanced cancer की quality of life पर जोर
डॉ. द्विवेदी ने विशेष रूप से advanced cancer के मामलों में मरीज की comfort, dignity और quality of life बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर अवस्था में मरीज के लक्षणों को नियंत्रित करने और उसे बेहतर सहारा देने की दिशा में supportive और palliative care की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
Cancer Homoeopathy Book Launch में कैंसर की रोकथाम पर भी हुई चर्चा
सम्मेलन में नई दिल्ली के डॉ. नवल कुमार वर्मा ने कैंसर की रोकथाम से जुड़े जोखिम कारकों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने तंबाकू, गुटखा, शराब, अन्य नशीले पदार्थों के सेवन तथा कुछ हानिकारक रसायनों और पेस्टिसाइड्स के संपर्क को कैंसर के जोखिम से जोड़े जाने की बात कही। उन्होंने बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए परिवार, विद्यालय और समाज की संयुक्त भूमिका पर जोर दिया।
Cancer Homoeopathy Book Launch में समय पर जांच की सलाह
डॉ. नवल कुमार वर्मा ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, कैंसर से जुड़े जोखिम कारकों से बचने और समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शरीर में दिखाई देने वाले किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और आवश्यकता होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
Cancer Homoeopathy Book Launch में पुस्तक में इन विषयों को किया गया शामिल
डॉ. ए.के. द्विवेदी की पुस्तक में कैंसर के विभिन्न प्रकार, बचाव, प्रारंभिक पहचान, कैंसर के साथ जीवन, advanced cancer में palliative care और मरीज तथा उनके परिवार के लिए supportive care जैसे विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाना और मरीजों व परिवारों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाना बताया गया है।
Cancer Homoeopathy Book Launch में डॉ. द्विवेदी ने दी महत्वपूर्ण सलाह
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य कैंसर के प्रति भय पैदा करना नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों को सही जानकारी और जागरूकता उपलब्ध कराना है। उन्होंने यह भी कहा कि कैंसर मरीज को अपनी बीमारी की स्थिति के अनुसार qualified medical professionals की सलाह से प्रमाणित उपचार लेना चाहिए। यह सावधानी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण होम्योपैथी को कैंसर को रोकने या उसका इलाज करने वाला प्रमाणित उपचार नहीं मानते हैं।
Cancer Homoeopathy Book Launch में देशभर के विशेषज्ञ हुए शामिल
सम्मेलन में Clinical Research Unit, CCRH, गोवा के डॉ. हनुमान चौधरी, नई दिल्ली के डॉ. नवल कुमार वर्मा, चंडीगढ़ के डॉ. विकास सिंघल, भोपाल के डॉ. डी.एन. मिश्रा सहित विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने supportive और palliative care, symptom management, मरीज की quality of life तथा मरीज और परिवार को भावनात्मक सहयोग देने जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
Cancer Homoeopathy Book Launch में मरीजों की बेहतर देखभाल पर मंथन
सम्मेलन का मुख्य फोकस कैंसर मरीजों की देखभाल को केवल बीमारी के उपचार तक सीमित न रखते हुए उनके दर्द, मानसिक तनाव, नींद, भूख, कमजोरी और भावनात्मक जरूरतों पर भी ध्यान देने पर रहा। विशेषज्ञों ने मरीज और उसके परिवार को बीमारी की विभिन्न अवस्थाओं में सही जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी चर्चा की।


