Mandsaur Temple Dispute का मामला सुजानपुरा और पिपल्दा क्षेत्र में सामने आया है। गोपालकृष्ण मंदिर से जुड़े रास्ते को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन देकर शिकायत की है। ग्रामीणों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव और प्रभाव के चलते मंदिर परिसर से नया रास्ता कायम कराने का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और राजस्व रिकॉर्ड के साथ मौके की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कराने की मांग की है।
Mandsaur Temple Dispute: मंदिर परिसर से नया रास्ता निकालने का आरोप
Mandsaur Temple Dispute को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित मकान तक पहुंचने के लिए पहले से ही रास्ते उपलब्ध हैं। इसके बावजूद मंदिर परिसर और उस भूमि से नया रास्ता निकालने की मांग की जा रही है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से धार्मिक आयोजनों के लिए किया जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि मंदिर परिसर से जुड़े रास्ते के मामले में सभी तथ्यों और रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।
Mandsaur Temple Dispute: धार्मिक आयोजनों के लिए होती है भूमि का इस्तेमाल
Mandsaur Temple Dispute में शिकायतकर्ताओं ने बताया कि गोपालकृष्ण मंदिर परिसर में लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर परिसर की व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाउंड्रीवाल का निर्माण भी ग्राम पंचायत की अनुमति से कराया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे में मंदिर परिसर और धार्मिक आयोजनों में उपयोग होने वाली भूमि से नया रास्ता निकाले जाने का प्रस्ताव पूरे मामले को विवादित बना रहा है।
Mandsaur Temple Dispute: कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
Mandsaur Temple Dispute के संबंध में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड की जांच के साथ मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का भी निरीक्षण कराया जाए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दस्तावेजों और मौके की स्थिति के आधार पर ही रास्ते को लेकर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने राजनीतिक दबाव के आरोपों की भी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
Mandsaur Temple Dispute: शिकायत के बाद प्रशासनिक जांच का इंतजार
Mandsaur Temple Dispute का मामला फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर प्रशासन के समक्ष है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड क्या कहता है, मौके पर रास्ते की वास्तविक स्थिति क्या है और नया रास्ता निकालने की मांग नियमों के अनुरूप है या नहीं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर मामले का समाधान करने की मांग की है।
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