Shravan Somvar Balrampur : बलरामपुर, छत्तीसगढ़। श्रावण मास को भगवान भोलेनाथ की आराधना और शिवभक्ति के लिए विशेष माना जाता है। सावन के अंतिम सोमवार को बलरामपुर जिले में भी आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। जिले के प्रसिद्ध तातापानी तपेश्वर धाम समेत प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही। कांवड़ में पवित्र जल लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की।
Shravan Somvar Balrampur : कांवड़ लेकर शिवालयों की ओर निकले श्रद्धालु
Shravan Somvar Balrampur के अवसर पर जिले के अलग-अलग इलाकों से कांवड़ियों की टोलियां सुबह से ही शिवालयों की ओर रवाना होती नजर आईं। श्रद्धालु नदियों और अन्य जलस्रोतों से कांवड़ में जल भरकर भगवान शिव के मंदिरों तक पहुंचे।
कई श्रद्धालुओं ने कई किलोमीटर तक पैदल यात्रा पूरी की। इस दौरान कांवड़ियों के बीच भगवान शिव के जयकारे गूंजते रहे। बोल बम और हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरे रास्ते और मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आए।
Shravan Somvar Balrampur: कनहर और चंदन नदी से जल लेकर पहुंचे कांवड़िए
रामानुजगंज की कनहर नदी, बलरामपुर की चंदन नदी और सिंदूर-कनहर नदी के संगम सहित विभिन्न जलस्रोतों से श्रद्धालुओं ने कांवड़ में जल भरा। इसके बाद कांवड़िए तातापानी स्थित तपेश्वर धाम के लिए रवाना हुए।
आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए तातापानी पहुंचे। कई कांवड़ियों ने करीब 14 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
Shravan Somvar Balrampur: 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर किया जलाभिषेक
Shravan Somvar Balrampur में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। कांवड़ियों की अलग-अलग टोलियां भक्ति गीतों और भगवान शिव के जयकारों के साथ आगे बढ़ती रहीं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि तातापानी तपेश्वर धाम में जलाभिषेक करने का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी आस्था के चलते सावन के अंतिम सोमवार को बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे और भगवान शिव का विधिवत जलाभिषेक किया।
Shravan Somvar Balrampur: तातापानी तपेश्वर धाम की धार्मिक मान्यता
तातापानी तपेश्वर धाम को क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। श्रद्धालुओं के अनुसार, इस स्थान का संबंध भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास काल से जुड़ा हुआ है। यहां भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग विराजमान होने की धार्मिक मान्यता है।
इसी वजह से सावन के महीने में तातापानी में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। खासकर सावन के सोमवार को यहां विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।
Shravan Somvar Balrampur: चारों सोमवार होती है विशेष पूजा
मंदिर के पुजारी के अनुसार, तातापानी में हर वर्ष सावन मेले का आयोजन किया जाता है। सावन के चारों सोमवार को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं।
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु तातापानी पहुंचते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।
Shravan Somvar Balrampur: 110 फीट ऊंची शिव प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
तातापानी तपेश्वर धाम परिसर में भगवान शंकर की करीब 110 फीट ऊंची प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस विशाल प्रतिमा के दर्शन भी करते हैं।
इसके अलावा मंदिर के गर्भगृह में देश के अलग-अलग स्थानों पर विराजमान 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप भी स्थापित किए गए हैं। प्राचीन शिव मंदिर भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
Shravan Somvar Balrampur: शिवालयों में लगी श्रद्धालुओं की कतार
Shravan Somvar Balrampur के दौरान जिले के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार देखने को मिली। भक्तों ने भगवान शिव को जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर पूजा-अर्चना की।
मंदिर परिसरों और आसपास के इलाकों में सुरक्षा एवं व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी रही। श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच पूरे जिले में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।
Shravan Somvar Balrampur : हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंजा तातापानी
सावन के अंतिम सोमवार को तातापानी तपेश्वर धाम सहित पूरे बलरामपुर जिले में भक्ति का वातावरण बना रहा। कांवड़ियों की टोलियां लगातार मंदिरों की ओर बढ़ती रहीं और रास्ते में हर-हर महादेव तथा बोल बम के जयकारे लगाते हुए नजर आईं।
श्रद्धालुओं के लिए सावन का अंतिम सोमवार आस्था और धार्मिक उत्साह से भरा रहा। कांवड़ यात्रा, जलाभिषेक और मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने पूरे जिले को शिवमय कर दिया।


