Uttarakhand Minority Education Act : मदरसों और स्कूलों से जुड़े प्रावधानों को दी गई चुनौती
Uttarakhand Minority Education Act : नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों और इसके तहत निर्धारित शैक्षणिक मानकों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में मदरसों और स्कूलों से संबंधित नियमों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया।
याचिकाकर्ता की ओर से सरकार को अतिरिक्त समय दिए जाने पर आपत्ति दर्ज की गई। साथ ही अब तक दाखिल नहीं किए गए दस्तावेजों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग की गई। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर की तारीख तय की है।

Uttarakhand Minority Education Act : सरकार ने कोर्ट से मांगा अतिरिक्त समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले से संबंधित अपना पक्ष और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि जिन दस्तावेजों को अब तक अदालत में दाखिल नहीं किया गया है, उन्हें रिकॉर्ड पर लाया जाना जरूरी है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को निर्धारित की है। अब अगली तारीख पर सरकार की ओर से संबंधित दस्तावेज और अपना पक्ष अदालत के सामने रखने की उम्मीद है।

Uttarakhand Minority Education Act : ऊधमसिंह नगर में 2006 से संचालित हैं मदरसे
याचिका में ऊधमसिंह नगर स्थित केबीएन सोसाइटी का भी उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार, सोसाइटी की ओर से वर्ष 2006 से मदरसों का संचालन किया जा रहा है। इन संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि संबंधित संस्थानों को उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त है और यहां बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। याचिका के मुताबिक इन संस्थानों में करीब 550 बच्चे पढ़ रहे हैं।
Uttarakhand Minority Education Act : नए मानकों को लेकर याचिकाकर्ता ने जताई चिंता
याचिका में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत मदरसों और स्कूली शिक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि नए मानकों को कम समय में पूरा करना इन संस्थानों के लिए कठिन हो सकता है। याचिकाकर्ता के अनुसार, यदि संस्थान निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाए तो आगामी शैक्षणिक सत्र में इनके संचालन पर संकट पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में वहां पढ़ने वाले सैकड़ों छात्रों की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
Uttarakhand Minority Education Act : छात्रों के भविष्य पर असर का दावा
याचिका में कहा गया है कि संबंधित संस्थानों में करीब 550 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यदि किसी कारण से इन संस्थानों का संचालन प्रभावित होता है या वे बंद होते हैं, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष छात्रों के हित और उनकी शिक्षा को जारी रखने से जुड़े पहलुओं को भी रखा गया है। मामले की अगली सुनवाई में इन मुद्दों पर भी अदालत के सामने पक्ष रखे जाने की संभावना है।
Uttarakhand Minority Education Act : संविधान के अनुच्छेद 30 का दिया गया हवाला
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 30 का भी हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। इसी संवैधानिक अधिकार के संदर्भ में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों और निर्धारित मानकों को चुनौती दी गई है। अब मामले में हाईकोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष और संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
Uttarakhand Minority Education Act : 1 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 1 सितंबर की तारीख तय की है। अब अगली सुनवाई में सरकार की ओर से मांगे गए अतिरिक्त समय के बाद दस्तावेज और जवाब अदालत के समक्ष रखे जाने हैं। फिलहाल अदालत ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित कर दी है। मामले से जुड़े पक्षों की निगाहें अब 1 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
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