Sleemanabad Tunnel : मध्यप्रदेश के सिंचाई इतिहास की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद टनल अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 जुलाई को कटनी जिले में इस ऐतिहासिक जल-सुरंग का निरीक्षण करेंगे। लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी यह सुरंग देश की सबसे लंबी जल-सुरंग मानी जा रही है, जिसके माध्यम से नर्मदा का जल प्राकृतिक गुरुत्वाकर्षण (Gravity Flow) से विंध्य और महाकौशल क्षेत्र तक पहुंचेगा। इस परियोजना से लाखों किसानों को स्थायी सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है।

Sleemanabad Tunnel : 17 वर्षों की चुनौती के बाद अंतिम चरण में पहुंची परियोजना
स्लीमनाबाद जल-सुरंग परियोजना का निर्माण वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। निर्माण के दौरान कठिन भू-गर्भीय परिस्थितियां, चट्टानों की जटिल संरचना और भारी जल रिसाव जैसी चुनौतियां सामने आईं। अत्याधुनिक तकनीक और लगातार मॉनिटरिंग के चलते अब यह परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही पूरी क्षमता के साथ संचालित होगी।
Sleemanabad Tunnel : 1450 गांवों और 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगा लाभ
इस जल-सुरंग के शुरू होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

Sleemanabad Tunnel : बिना बिजली के पहुंचेगा नर्मदा का पानी
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नर्मदा का पानी किसी बड़े पंप की सहायता से नहीं, बल्कि ग्रेविटी फ्लो के जरिए सुरंग से होकर खेतों तक पहुंचेगा। लगभग 10.14 मीटर व्यास वाली यह सुरंग देश की पहली ऐसी बड़ी परियोजनाओं में शामिल है, जहां प्राकृतिक ढाल का उपयोग कर जल आपूर्ति की जाएगी।
Sleemanabad Tunnel : आधुनिक तकनीक से पार की गई कठिन भू-गर्भीय चुनौतियां
टनल निर्माण के दौरान मार्बल, लाइमस्टोन, डोलोमाइट और भूमिगत गुफाओं जैसी कठिन संरचनाओं ने काम को चुनौतीपूर्ण बना दिया था। कई स्थानों पर भारी जल रिसाव भी हुआ। इसके बाद आधुनिक जर्मन मशीनों और विशेष ग्राउटिंग तकनीक का उपयोग कर परियोजना को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया गया।

Sleemanabad Tunnel : 1600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार हुआ मेगा प्रोजेक्ट
शुरुआत में इस परियोजना की लागत लगभग 799 करोड़ रुपये थी, लेकिन तकनीकी सुधार, अतिरिक्त सुरक्षा उपायों और निर्माण कार्य के विस्तार के कारण अब तक इस पर 1610 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। वर्तमान में परियोजना का 96 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।
Sleemanabad Tunnel : 2027 तक लाखों हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित
राज्य सरकार के अनुसार मार्च 2026 तक 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। दिसंबर 2026 तक इसे बढ़ाकर 87 हजार हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

Sleemanabad Tunnel : कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
स्लीमनाबाद टनल परियोजना केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के किसानों के लिए नई उम्मीद भी है। इस परियोजना से सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा, जल संकट कम होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह परियोजना मध्यप्रदेश के जल प्रबंधन और कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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