India Wholesale Inflation : मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर लागत का दबाव बरकरार,आम जनता परेशान, कब समाधान निकालेगी सरकार ?
India Wholesale Inflation : आम लोगो पर फिर एक बार महंगाई की मार पड़ी है…भारत की थोक महंगाई दर जून में बढ़कर 9.87% हो गई, जो मई में 9.68% थी। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी और मैन्युफैक्चरिंग लागत का दबाव इसका मुख्य कारण रहा। फ्यूल इंफ्लेशन में कमी के बावजूद, खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोग परेशान है…और मंहगाई की मार से उनके घर का बजट बिगड़ गया है, सब्ज़ियों में मुख्य रूप से टमाटर और अदरक के दाम तेज़ी से उछले हैं। इसके अलावा अनाज और दलहन की कीमतों में भी इज़ाफ़ा हुआ है, जिससे घर की थाली महंगी हो गई है ऐसे में बढ़ती मंहगाई से लोगो को कब रहत मिलेगी ? कैसे आम आदमी इस मंहगाई में अपने बजट को बनाकर रखे और सरकार की तरफ से क्या राहत मिल सकती है ? इसी पर करेंगे चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट |

India Wholesale Inflation : थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर लगातार दूसरे महीने दोहरे अंकों के करीब रही। इसमें खाने-पीने की चीजों, पेट्रोलियम उत्पादों, बेसिक मेटल्स और केमिकल्स की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा योगदान रहा। सभी कमोडिटीज के लिए ‘ऑल इंडिया WPI’ जून में 110.2 रहा, जो मई में 109.9 था। भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। आइये नजर डालते है क्या क्या महंगा हुआ ?
India Wholesale Inflation : अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी से चल रहा तनाव कम नहीं हुआ तो इसके दामों में और इजाफा हो सकता है। इससे पहले कल रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी हुए थे। रिटेल महंगाई भी लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है। थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहने से ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका बुरा असर पड़ता है। अगर थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है तो प्रोड्यूसर इसका बोझ कंज्यूमर्स पर डाल देते हैं। जिसके चलते जनता बढ़ती मंहगाई की मार से दो चार हो रही है…जिससे पक्ष-विपक्ष में बड़ी तकरार देखने को मिल रही है |
India Wholesale Inflation : बहरहाल सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। लिहाजा बढ़ती महंगाई आम लोगो के साथ अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है, ऐसे में इस महंगाई की मार से कैसे बचा जाये और अर्थव्यवस्था में भी मजबूती बनी रहे इसके लिए कौन से ठोस कदम उठाये

