Kailash Mansarovar Yatra : लिपुलेख दर्रे से चीन में प्रवेश किया पहला जत्था
Kailash Mansarovar Yatra : कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 का पहला जत्था गुरुवार को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित लिपुलेख दर्रे के रास्ते चीन में प्रवेश कर गया। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और संबंधित अधिकारियों ने सभी आवश्यक आव्रजन एवं सीमा संबंधी औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद यात्रा दल को चीन की सीमा पर तैनात अधिकारियों के सुपुर्द किया।

Kailash Mansarovar Yatra : पहले दल में 52 सदस्य शामिल
पहले यात्रा दल में कुल 52 सदस्य शामिल हैं। इनमें 48 श्रद्धालु, एक चिकित्साकर्मी (डॉक्टर) और तीन किचन स्टाफ के सदस्य शामिल हैं। सीमा पार करने के बाद यह दल निर्धारित पड़ावों पर रुकते हुए पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा पूरी करेगा।
Kailash Mansarovar Yatra : विदेश मंत्रालय के समन्वय में हो रही यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के समन्वय में किया जा रहा है। यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों, उत्तराखंड प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है।

Kailash Mansarovar Yatra : सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान
लिपुलेख मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। आईटीबीपी, स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियां पूरे यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक सुविधाओं की निगरानी कर रही हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
Kailash Mansarovar Yatra : धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है यात्रा
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। भगवान शिव का निवास माने जाने वाले कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस कठिन लेकिन आस्था से जुड़ी यात्रा में शामिल होते हैं।
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