विदेश नीति को लेकर घरेलू राजनीति में सियासी टकराव, विस्तारवादी राजनीति में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का नतीजा ?
Vijay Nandan डिजिटल एडिटर
Sonia Gandhi Gaza article controversy : नई दिल्ली, कांग्रेस नेता Sonia Gandhi द्वारा गाजा पर लिखे गए लेख के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। अपने लेख में उन्होंने भारत की गाजा नीति और फलस्तीन मुद्दे पर रुख को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत का पारंपरिक रुख फलस्तीन के समर्थन में रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इजरायल के साथ बढ़ते संबंधों के चलते संतुलन बदला है।
"The Modi government’s silence and inaction are not just morally reprehensible but also inexplicable from a national interest perspective. We are slipping further into Israel’s strategic orbit, at a time when the world is increasingly pivoting away from it.
Sonia Gandhi Gaza article controversy : सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि भारत गाजा संकट पर अपेक्षाकृत चुप रहा है और मानवाधिकारों को लेकर उतनी मुखरता नहीं दिखाई गई, जितनी अपेक्षित थी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए गाजा में मानवीय संकट का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती हिंसा और मानवीय क्षति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय प्रभावी कदम नहीं उठा सका है।
Sonia Gandhi Gaza article controversy : बीजेपी का पलटवार, वोट बैंक की राजनीति का आरोप
इस पूरे बयान पर Bharatiya Janata Party ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता shehzad punawala ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विदेश नीति को भी वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखती है। बीजेपी का कहना है कि भारत ने गाजा और फलस्तीन दोनों मुद्दों पर समय-समय पर मानवीय सहायता दी है और अपनी स्थिति स्पष्ट रखी है।
#WATCH | Delhi | On a recent editorial by Sonia Gandhi attacking PM Modi Govt over silence on Israel's action in Gaza, BJP spokesperson Shehzad Poonawalla says, "Those who are penning articles on Gaza, tweet on Rafah, carry the bags, are silent eloquently on Hindus in Dhaka. It… pic.twitter.com/QpEJP5r6dL
Sonia Gandhi Gaza article controversy : हमास और इजरायल विवाद का भी जिक्र
बीजेपी ने अपने बयान में 2023 में इजरायल पर हुए हमलों और उसके बाद गाजा में बढ़े संघर्ष का भी उल्लेख किया। पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर चुनिंदा प्रतिक्रिया देती है।
Sonia Gandhi Gaza article controversy : विदेश नीति बनाम राजनीतिक नैरेटिव
यह विवाद अब सिर्फ गाजा मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की विदेश नीति और घरेलू राजनीति के टकराव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाते हैं। गाजा पर लेख को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर दिखा दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी भारत की घरेलू राजनीति में गहराई से असर डालते हैं। कांग्रेस और बीजेपी के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
विदेश नीति को लेकर भारतीय राजनीतिक दलों के बीच पहले अपेक्षाकृत अधिक सहमति दिखती थी, खासकर शीत युद्ध के दौर और उसके बाद शुरुआती दशकों में। इसका एक कारण यह था कि उस समय विदेश नीति का संचालन अधिकतर एक “कूटनीतिक विशेषज्ञता” का विषय माना जाता था, जिसे घरेलू राजनीतिक बहस से अलग रखा जाता था।
लेकिन हाल के वर्षों में यह तस्वीर बदली है। वैश्वीकरण, सोशल मीडिया, तेजी से बढ़ती सूचना-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के सीधे घरेलू असर ने विदेश नीति को भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना दिया है। अब गाजा, यूक्रेन या किसी वैश्विक संकट पर भी दल अपने-अपने वैचारिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रतिक्रिया देते हैं।
इसे सीधे तौर पर “मूल्यों में गिरावट” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। यह अधिकतर लोकतांत्रिक राजनीति के विस्तार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का संकेत है, जहां हर नीति पर सवाल और बहस सामान्य हो गई है। हालांकि चिंता तब बढ़ती है जब विदेश नीति जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तथ्यात्मक समझ की जगह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हावी हो जाएं। असल जरूरत इस बात की है कि राष्ट्रीय हित, दीर्घकालिक रणनीति और कूटनीतिक संतुलन को राजनीतिक बहस से ऊपर रखा जाए। तभी विदेश नीति की निरंतरता और विश्वसनीयता बनी रह सकती है।
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