लेखक: गोविंद सिंह राजपूत, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री
International Yoga Day 2026 : वर्तमान समय में मानव सभ्यता अभूतपूर्व वैज्ञानिक प्रगति के दौर से गुजर रही है। तकनीकी विकास ने जीवन को सुविधाजनक तो बनाया है, किंतु इसके साथ ही तनाव, अवसाद, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग तथा मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएँ भी तेजी से बढ़ी हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में मनुष्य स्वयं से, प्रकृति से और अपनी आंतरिक चेतना से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में योग केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि संतुलित, स्वस्थ और सार्थक जीवन जीने का एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक मार्ग बनकर सामने आया है। यही कारण है कि आज योग भारत की सीमाओं से निकलकर संपूर्ण विश्व के लिए स्वास्थ्य, शांति और समरसता का संदेशवाहक बन चुका है।
International Yoga Day 2026 : इसी वैश्विक महत्व को स्वीकार करते हुए प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सामूहिक आह्वान है। योग भारत की उस महान सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जिसने सदियों से मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है।

International Yoga Day 2026 : योग का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। भारतीय ऋषियों और मनीषियों ने गहन साधना एवं अनुभव के आधार पर योग की अवधारणा विकसित की। महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योगसूत्र योग दर्शन का आधार ग्रंथ माना जाता है। योग शब्द संस्कृत धातु “युज” से बना है, जिसका अर्थ है – जोड़ना, मिलाना अथवा एकीकरण। योग का वास्तविक उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। यह मनुष्य को बाहरी संसार की भागदौड़ से निकालकर उसके अंतर्मन से जोड़ता है और जीवन में संतुलन स्थापित करता है।
International Yoga Day 2026 : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत भारत की एक ऐतिहासिक पहल का परिणाम है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के प्रधानमंत्री ने योग को मानवता की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को विश्व के अनेक देशों का अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हुआ और 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति का गौरवपूर्ण क्षण था। तब से प्रत्येक वर्ष विश्व के लगभग सभी देशों में लाखों लोग योगाभ्यास कर इस दिवस को उत्सव के रूप में मनाते हैं।
21 जून को योग दिवस के लिए चुने जाने का भी विशेष महत्व है। यह वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे ग्रीष्म अयनांत कहा जाता है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में यह काल चेतना के विकास और ऊर्जा के संवर्धन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए यह तिथि योग के वैश्विक संदेश के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी गई।
International Yoga Day 2026 : आज योग को केवल आध्यात्मिक साधना के रूप में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी स्वीकार किया जा रहा है। अनेक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित योगाभ्यास शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, रक्त संचार को संतुलित करता है, हृदय को स्वस्थ रखता है तथा मानसिक तनाव को कम करता है। प्राणायाम और ध्यान मन को एकाग्र बनाते हैं तथा सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। कोरोना महामारी के दौरान भी योग और प्राणायाम ने लोगों को मानसिक एवं शारीरिक रूप से मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
योग की विशेषता यह है कि यह व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास पर बल देता है। यह केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मानुशासन, धैर्य, सहनशीलता और आत्मविश्वास जैसे गुणों का भी विकास करता है। योग हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन और संतोष से प्राप्त होती है। यही कारण है कि आज विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, कार्यालयों, सैन्य संस्थानों और सामाजिक संगठनों में योग को जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है।
International Yoga Day 2026 : भारत की संस्कृति सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात् सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है, के सिद्धांत पर आधारित रही है। योग इसी भावना का विस्तार है। योग किसी धर्म, संप्रदाय, जाति या देश विशेष से बंधा नहीं है। यह मानवता के सार्वभौमिक कल्याण का मार्ग है। विश्व के विभिन्न देशों में विभिन्न संस्कृतियों और जीवन पद्धतियों के लोग योग को अपनाकर इसके लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह भारत के सांस्कृतिक नेतृत्व और आध्यात्मिक ज्ञान की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
आज जब विश्व युद्ध, हिंसा, तनाव, पर्यावरणीय संकट और सामाजिक विघटन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग शांति, सह-अस्तित्व और संतुलन का संदेश देता है। योग मनुष्य को स्वयं के भीतर झांकने, अपने विचारों को शुद्ध करने और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की प्रेरणा देता है। यह व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक और वैश्विक स्वास्थ्य का भी आधार है।
विकसित भारत के निर्माण में भी योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वस्थ नागरिक ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। यदि समाज शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से स्वस्थ होगा तो राष्ट्र स्वतः ही प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। इसलिए योग केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का भी एक सशक्त माध्यम है। आज आवश्यकता इस बात की है कि योग को केवल एक दिवस के आयोजन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाया जाए।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को स्मरण करने और उसे जीवन में आत्मसात करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सच्चा विकास तभी संभव है जब शरीर स्वस्थ, मन शांत और आत्मा जागृत हो। योग हमें यही मार्ग दिखाता है। इसलिए आइए, इस योग दिवस पर हम सभी यह संकल्प लें कि योग को अपने जीवन की नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे तथा स्वस्थ, जागरूक और संतुलित समाज के निर्माण में योगदान देंगे।
योग केवल आसन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है; योग केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि मानवता के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।
“करें योग, रहें निरोग” केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध विश्व की दिशा में एक सशक्त संकल्प है।
(लेखक मप्र के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री हैं)

