Political Comedy : भाइयों और बहनों, देश बड़ा अजीब दौर से गुजर रहा है। सुबह उठिए तो पता नहीं चलता कि मौसम बदला है, नेता बदला है या फिर पड़ोसी ने अपनी सोशल मीडिया डीपी बदल दी है। हर तरफ बदलाव ही बदलाव है। ऐसा लगता है कि परिवर्तन ही इस युग का राष्ट्रीय चरित्र बन गया है।
सबसे पहले बात नेताओं की। पहले जमाने में नेता पार्टी बदलते थे तो अखबारों में हफ्तों चर्चा होती थी। अब तो हालत यह है कि अगर कोई नेता छह महीने तक एक ही पार्टी में रह जाए तो लोग पूछने लगते हैं, “सब ठीक तो है न?” नेता जी आज जिस पार्टी को देश का उद्धारक बता रहे हैं, कल उसी को लोकतंत्र का सबसे बड़ा खतरा बताकर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं। जनता भी अब इतनी अनुभवी हो चुकी है कि पार्टी बदलने की खबर पढ़कर चाय की चुस्की लेते हुए कहती है, “अच्छा… तो आज इधर गए हैं!
Political Comedy : राजनीति में अब विचारधारा से ज्यादा महत्व लोकेशन अपडेट का हो गया है। जैसे मोबाइल ऐप बताता है कि आपका पार्सल कहां पहुंचा, वैसे ही जनता जानना चाहती है कि उसका नेता फिलहाल किस पार्टी में पहुंचा। राजनीतिक दलों के कार्यालय अब रेलवे स्टेशन जैसे लगने लगे हैं। कोई आ रहा है, कोई जा रहा है और बाकी लोग प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर अगली ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं।

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उधर जनता भी पीछे नहीं है। नेताओं ने पार्टी बदलने की कला विकसित की तो जनता ने डीपी बदलने की। पहले लोग सालों तक एक ही फोटो लगाए रखते थे। अब मूड बदला नहीं कि डीपी बदल गई। क्रिकेट टीम जीत गई तो तिरंगा, हार गई तो काला बैकग्राउंड। बारिश हुई तो बादल वाली फोटो, धूप निकली तो चश्मा लगाकर सेल्फी।
Political Comedy : कुछ लोगों की डीपी देखकर लगता है कि वे जीवन नहीं जी रहे, बल्कि 24 घंटे का लाइव प्रसारण कर रहे हैं। सुबह योग वाली डीपी, दोपहर में ऑफिस वाली, शाम को जिम वाली और रात को मोटिवेशनल कोट्स। कई बार तो रिश्तेदारों को समझ नहीं आता कि फोन में सेव व्यक्ति वही है या कोई नया अपडेट आ गया है।
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और अब बात मौसम की। बेचारा मौसम भी आजकल नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स से प्रेरणा ले रहा है। सुबह मौसम विभाग कहता है कि तेज धूप रहेगी। जनता कपड़े सुखाने डालती है और दो घंटे बाद बादल आकर कह देते हैं, “सरप्राइज!” फिर बारिश शुरू हो जाती है। शाम तक फिर धूप निकल आती है, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
Political Comedy : मौसम का मूड अब कॉलेज के छात्र जैसा हो गया है। कब क्लास में आएगा, कब बंक करेगा और कब अचानक टेस्ट ले लेगा, कोई नहीं जानता। किसान आसमान की तरफ देखकर अनुमान लगाता है, मौसम ऐप मोबाइल की तरफ देखकर। दोनों की भविष्यवाणी कई बार गलत निकल जाती है।
Political Comedy : असल में देश में सबसे स्थिर चीज अब अस्थिरता ही बची है। नेता पार्टी बदल रहे हैं, जनता डीपी बदल रही है और मौसम अपना मूड। ऐसे में आम आदमी सोच रहा है कि कम से कम गैस सिलेंडर और बिजली का बिल तो स्थिर रह जाए। लेकिन वहां भी हर महीने कोई न कोई सरप्राइज उसका इंतजार कर रहा होता है।
इसलिए अब सलाह यही है कि बदलाव को स्वीकार कर लीजिए। नेता कब किस मंच पर दिखाई दे जाएं, दोस्त कब नई डीपी लगा दे और बादल कब बरस पड़ें, इसकी चिंता छोड़ दीजिए। क्योंकि इस दौर का सबसे बड़ा सच यही है कि यहां हर कोई बदल रहा है। बस आम आदमी की परेशानियां ही हैं जो वर्षों से अपनी जगह पर मजबूती से टिकी हुई हैं।
और शायद यही हमारे समय का सबसे बड़ा हास्य हथौड़ा भी है।

