MLA MP Pension Scheme : नेताओं की पेंशन पर फिर छिड़ी बहस
MLA MP Pension Scheme : देश में अक्सर यह सवाल उठता है कि विधायक (MLA) और सांसद (MP) को मिलने वाली पेंशन का नियम क्या है? क्या कोई व्यक्ति जितनी बार विधायक या सांसद चुना जाता है, उसकी पेंशन उतनी ही बढ़ती जाती है? क्या एक नेता विधायक और सांसद दोनों की पेंशन एक साथ ले सकता है? इन सवालों को लेकर आम लोगों में काफी जिज्ञासा रहती है।दरअसल सांसदों और विधायकों की पेंशन व्यवस्था सामान्य सरकारी कर्मचारियों की पेंशन से अलग कानूनों के तहत संचालित होती है।

MLA MP Pension Scheme : सांसदों को कैसे मिलती है पेंशन?
सांसदों की पेंशन Salary, Allowances and Pension of Members of Parliament Act, 1954 के तहत तय होती है। वर्तमान नियमों के अनुसार पूर्व सांसदों को आधार पेंशन मिलती है और पांच वर्ष से अधिक सेवा करने पर प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष के लिए अतिरिक्त पेंशन जोड़ी जाती है। वर्ष 2023 से संशोधित दरों के अनुसार पूर्व सांसदों की मूल पेंशन 31,000 रुपये प्रतिमाह है, जबकि पांच साल से अधिक सेवा के प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष पर 2,500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त पेंशन मिलती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई सांसद 10 वर्ष तक संसद का सदस्य रहा है, तो उसे मूल पेंशन के साथ अतिरिक्त 5 वर्षों का लाभ भी मिलेगा।
MLA MP Pension Scheme : क्या हर कार्यकाल पर अलग पेंशन मिलती है?
सांसदों के मामले में हर कार्यकाल के लिए अलग-अलग पेंशन नहीं मिलती, बल्कि कुल सेवा अवधि को जोड़ा जाता है। यानी यदि कोई व्यक्ति दो बार सांसद बना और उसकी कुल सेवा अवधि 10 वर्ष रही, तो पेंशन उसी कुल अवधि के आधार पर तय होगी।
MLA MP Pension Scheme : विधायकों की पेंशन का नियम अलग-अलग राज्यों में अलग
विधायकों की पेंशन का कोई एक राष्ट्रीय नियम नहीं है। प्रत्येक राज्य अपनी विधानसभा के लिए अलग कानून बनाता है। कई राज्यों में विधायक बनने के बाद मूल पेंशन मिलती है और अतिरिक्त कार्यकाल या अतिरिक्त वर्षों के आधार पर पेंशन बढ़ती है। कुछ राज्यों में लंबे समय तक यह व्यवस्था रही कि जितने अधिक कार्यकाल, उतनी अधिक पेंशन। हालांकि कुछ राज्यों ने इस व्यवस्था में बदलाव भी किया है। मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में विधायक पेंशन राज्य के अलग अधिनियमों के तहत निर्धारित होती है।
MLA MP Pension Scheme : क्या एक नेता सांसद और विधायक दोनों की पेंशन ले सकता है?
यह सबसे चर्चित सवालों में से एक है। उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पूर्व सांसद भी रहा है और पूर्व विधायक भी, तो कई मामलों में उसे दोनों पदों की पेंशन प्राप्त हो सकती है। एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी सामने आई थी कि पूर्व सांसद, पूर्व विधायक या विधान परिषद सदस्य की पेंशन लेने के बावजूद सांसद पेंशन के पात्र बने रह सकते हैं।
MLA MP Pension Scheme : आलोचना और समर्थन दोनों
राजनीतिक पेंशन व्यवस्था को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। आलोचकों का तर्क है कि नेताओं को कम अवधि की सेवा पर आजीवन पेंशन मिलना उचित नहीं है, जबकि समर्थकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के लिए यह संवैधानिक पद से जुड़ी वैधानिक व्यवस्था है।
MLA MP Pension Scheme : क्या भविष्य में बदल सकते हैं नियम?
देश में राजनीतिक पेंशन व्यवस्था में सुधार की मांग समय-समय पर उठती रही है। कुछ राज्यों ने पहले ही बहु-पेंशन (Multiple Pension) व्यवस्था में बदलाव किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सांसदों और विधायकों की पेंशन व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो सकती है।

