TMC Crisis West Bengal : ऋतब्रत बनर्जी चुने गए विधायक दल के नेता ,ममता ने पार्टी कमेटियां भंग की,आगे का रास्ता क्या ?
TMC Crisis West Bengal : तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है. पार्टी के विधायकों का एक धड़ा शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मानने से इनकार कर रहा था…जबकि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को ममता बनर्जी ने नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए चुना था…60 बागी विधायकों का गुट ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहते थे. लेकिन ममता ने ऋतब्रत बनर्जी को कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए TMC से निलंबित कर दिया…बढ़ाते विरोध और उठापटक के बीच 58 विधायक tmc से अलग हो गए और पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता घोषित किया और विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मिलकर समर्थन पत्र भी सौंपा। ऐसे में सवाल इस बात का है कि बंगाल में क्या tmc ख़तम हो जाएगी ? बीजेपी का बढ़ता जनाधार क्या क्षेत्रीय पार्टियों के लिए बड़ा खतरा है ? और आने वाला समय अन्य दलों के लिए किस तरह का राजनीतिक agenda सेट करेगा ? इसी पर करेंगे चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट |
TMC Crisis West Bengal : TMC चोट और ऑपरेशन विस्फोट से दो चार हो रही है, हालाँकि ये घटनाक्रम रातो रात सामने नहीं आया…इसकी शुरुआत तब हुई जब ममता बनर्जी ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी से निकाल दिया. इसके बाद कोलकाता के एक होटल में गुप्त मीटिंग हुई और आगे की रणनीति बन गई….अब पश्चिम बंगाल में ममता की TMC में फूट पड़ गई है। सोमवार को पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी के 58 बागी MLA ने विधायक दल का नेता घोषित किया और विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मिलकर समर्थन पत्र भी सौंपा। जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता बनाया गया है। वहीं अखरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है। हालांकि बागी गुट ने अपने पत्र में ममता बनर्जी को अब भी पार्टी अध्यक्ष बताया है। लेकिन अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व और विधायक दल से जुड़े फैसलों को मानने से इनकार किया है। सोमवार को अभिषेक बनर्जी के लेटर हेड पर स्पीकर को भेजे गए पत्र में शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने का प्रस्ताव भेजा था। विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने शिकायत की थी कि इस प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। शिकायत के बाद ममता ने दोनों विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। बहरहाल पार्टी के भीतर बगावत के बीच ममता बनर्जी ने बुधवार को राज्य की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी अब पूरे संगठन का पुनर्गठन करेगी। इस बीच ममता ने दावा किया कि पुलिस TMC विधायकों को डरा धमका कर भाजपा जॉइन करने का दबाव बना रही है |
TMC Crisis West Bengal : पश्चिम बंगाल में ये परिद्रश्य महाराष्ट्र में हुए खेला को याद दिलाता है | महाराष्ट्र में पिछले पांच सालों में दो बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां टूट चुकी हैं। 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना का बड़ा गुट अलग हो गया, जबकि 2023 में अजित पवार के साथ NCP का एक बड़ा धड़ा अलग हो गया। दोनों मामलों में अलग हुए गुटों ने पार्टी और चुनाव चिह्न पर भी दावा किया, जिससे इसे महाराष्ट्र की नई दल-बदल राजनीति का उदाहरण माना जाता है। कुछ इसी तरह की बानगी पश्चिम बंगाल में देखने को मिली है जिस पर तमाम प्रतिक्रियाओं ने जोर पकड़ा है |
TMC Crisis West Bengal : बीजेपी के बढ़ते जनाधार के बीच सवाल क्षेत्रीय पार्टियों के अस्तित्व पर भी है, क्षेत्रीय दलों ने भारत की राष्ट्रीय राजनीति में विशेष रूप से 1989 में शुरू हुए गठबंधन के दौर के बाद अपनी जगह बनाई. 2014 से पहले तक दिल्ली में सत्ता की चाबी इन्हीं दलों के हाथों में रही है….वाजपेयी के समय में बीजेपी ख़ुद भी मज़बूत क्षेत्रीय ताक़तों के साथ गठबंधन करके ही उभरी थी…लेकिन उनकी बढ़ती कमज़ोरी से अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या क्षेत्रीय दल बीजेपी के ‘डबल इंजन वाली सरकार’ के नारे के सामने कमज़ोर पड़ रहे हैं? इन मुश्किलों से कैसे ये दल भारतीय जनता पार्टी को टक्कर देंगे ? ये देखने वाली बात होगी ? इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायकों और सांसदों की संभावित बगावत से लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ताकत और उसके संख्या बल में सीधे तौर पर भारी इजाफा होगा |

