Sadanira Samagam : भोपाल में आयोजित सदानीरा समागम के पांचवें दिन कला, संस्कृति और पर्यावरण चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारत भवन के विभिन्न मंचों पर लोक संगीत, भरतनाट्यम और विश्वप्रसिद्ध बैले नाट्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

Sadanira Samagam : निमाड़ी लोकगीतों ने बिखेरा लोक संस्कृति का रंग
कार्यक्रम की शुरुआत पूर्वरंग मंच पर हुई, जहां प्रसिद्ध निमाड़ी लोकगायिका मनीषा शास्त्री और उनके दल ने लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति दी। निमाड़ अंचल की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े गीतों के माध्यम से कलाकारों ने जल संरक्षण, प्रकृति प्रेम और पर्यावरणीय संतुलन का संदेश दिया।लोकधुनों की मधुरता और पारंपरिक गायन शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान सभागार में उपस्थित लोगों ने कलाकारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और उनकी कला की सराहना की।
Sadanira Samagam : ‘नर्मदे हर हर’ में दिखाई दी नर्मदा की आध्यात्मिक महिमा
सांस्कृतिक संध्या के प्रमुख आकर्षणों में प्रसिद्ध भरतनाट्यम कलाकार वैभव आरेकर की एकल नृत्य प्रस्तुति ‘नर्मदे हर हर’ शामिल रही। इस प्रस्तुति में उन्होंने नर्मदा नदी की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक महत्व और जीवनदायिनी स्वरूप को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।भरतनाट्यम की भावप्रधान शैली, संगीत और अभिव्यक्ति के माध्यम से नर्मदा के प्रति भारतीय समाज की आस्था और श्रद्धा को मंच पर जीवंत किया गया। दर्शकों ने प्रस्तुति को खड़े होकर सराहा और इसे कार्यक्रम की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुतियों में से एक बताया।

Sadanira Samagam : विश्वप्रसिद्ध बैले ‘स्वान लेक’ ने बांधा समां
भारत भवन के अंतरंग सभागार में विश्वप्रसिद्ध बैले नाट्य प्रस्तुति ‘स्वान लेक’ का मंचन किया गया। द इंपीरियल फर्नांडो बैले कंपनी द्वारा प्रस्तुत इस कालजयी कृति ने प्रेम, विश्वास, त्याग और संघर्ष की भावनाओं को जीवंत कर दिया।प्रस्तुति की कोरियोग्राफी महान बैले आचार्य मारियस पेटीपा की मूल रचना पर आधारित थी, जिसे फर्नांडो अगुइलेरा ने आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का निर्देशन फर्नांडो अगुइलेरा और रफी खान ने किया, जबकि संगीत महान रूसी संगीतकार प्योत्र इलाइची टचैकोवस्की की रचनाओं पर आधारित था।
Sadanira Samagam : प्रेम और संघर्ष की कहानी ने छुआ दिल
‘स्वान लेक’ की कहानी राजकुमारी ओडेट के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे दुष्ट जादूगर रोथबार्ट के श्राप के कारण हंस का जीवन जीना पड़ता है। झील के किनारे उसकी मुलाकात राजकुमार सीगफ्रीड से होती है और दोनों के बीच प्रेम जन्म लेता है।सच्चे प्रेम की शक्ति से श्राप को तोड़ने की इस भावनात्मक कहानी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय, आकर्षक वेशभूषा और शानदार मंच सज्जा ने प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया।

Sadanira Samagam : जल संरक्षण और संस्कृति को जोड़ रहा है सदानीरा समागम
सदानीरा समागम केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं है, बल्कि यह जल संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को एक साथ जोड़ने का प्रयास भी है। विभिन्न कला माध्यमों के जरिए समाज को प्रकृति और जल संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।कार्यक्रम में देशभर के कलाकारों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहभागिता भी देखने को मिल रही है, जिससे यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति और पर्यावरण चेतना का प्रभावी मंच बनता जा रहा है।
Sadanira Samagam : संस्कृति और पर्यावरण के संदेश का बना सशक्त मंच
भारत भवन में आयोजित सदानीरा समागम का पांचवां दिन कला, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। लोकगीतों से लेकर भरतनाट्यम और विश्वप्रसिद्ध बैले तक, हर प्रस्तुति ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश भी दिया। यही कारण है कि यह आयोजन प्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशेष पहचान बना रहा है।
READ MORE : Development Projects : सीएम डॉ. मोहन यादव ने खोला पिटारा, शाजापुर को दी 388 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

