Trump Xi Meeting : युद्ध पर ट्रंप की कूटनीति, वैश्विक दबाव की रणनीति,ईरान-अमेरिकी टकराव, अमेरिका का चीन पर क्या प्रभाव ?
Trump Xi Meeting : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर जाने वाले हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप के प्रस्तावित चीन दौरे ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप का चीन दौरा वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम है। एक रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप 13 से 15 मई के बीच चीन पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिंनपिंग से होगी। इस दौरे की सबसे बड़ी वजह ईरान-इजराइल संघर्ष और उससे पैदा हुआ वैश्विक संकट माना जा रहा है। दरअसल अमेरिका को लगता है कि ईरान पर चीन का प्रभाव सबसे ज्यादा है, क्योंकि चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। ट्रंप चीन पर दबाव बनाना चाहते हैं कि वह ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नरम रुख अपनाने के लिए राजी करे।दोनों देशों के संघर्ष और संकट के दौर में अभी स्थिति पूर्ण युद्ध और कूटनीतिक गतिरोध के बीच फंसी हुई है। ऐसे में अमेरिका दबाव बनाकर ईरान को समझौते के लिए मजबूर करना चाहता है, जबकि ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजार, समुद्री व्यापार और एशियाई अर्थव्यवस्थाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। भारत में भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की देश के जनता से 24 घंटे में दो बार की गई अपील ने भी आने वाले वक्त में किसी भी तरह की अनिश्तितता की स्थिति से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे माहौल में ट्रंप का चीन जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। सवाल ये कि इस्लामाबाद की कूटनीतिक विफलता के बाद अब जंग रुकवाने में क्या चीन बनेगा नया संकटमोचक ? क्या ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका अपनी रणनीति बार बार बदल रहा है ? फिलहाल अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजिंग में होने वाली बातचीत से क्या कोई बड़ा समाधान निकलता है या अमेरिका-ईरान के बीच गहराया तनाव युद्ध में बदलेगा। इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे, लेकिन पहले ये रिपोर्ट देख लेते हैं।

Trump Xi Meeting : न अमेरिका मानने को तैयार है और न ही ईरान झुकने को तैयार। दोनों देशों की जिद ने न सिर्फ कुछ देशों को बल्कि दुनिया को संकट में डाल रखा है। शांतिवार्ता पर बात न बनने के बाद अब एक बार फिर मिडिल-ईस्ट में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। जिस तरह से हालिया घटनाक्रम सामने आए हैं, उससे संकेत यही हैं कि युद्ध विराम के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं, और किसी भी समय बड़ा सैन्य टकराव फिर शुरू हो सकता है। इस तनाव के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण और अमेरिका-इजराइल की संयुक्त रणनीति मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए वार्ताएं जारी हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहरी असहमति बनी हुई है। अप्रैल माह में इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे चली शांतिवार्ता भी बेनतीजे रही थी। जिसके बाद की बातचीत भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।अब अमेरिका के प्रस्ताव पर ईरान के सख्त रुख ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को और आक्रामक बना दिया है। ईरान ने युद्धविराम और परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी शर्तों को ठुकराते हुए अपनी 14 सूत्रीय मांगें सामने रख दी हैं, जिसके बाद ट्रंप ने तेहरान के प्रस्ताव को “गार्बेज” और “पूरी तरह अस्वीकार्य” करार दिया। अब इस पूरे संकट के बीच ट्रंप की नजर चीन पर टिक गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप जल्द ही चाईना के दौरे पर जा सकते हैं, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। माना जा रहा है कि ट्रंप, चीन के जरिए ईरान पर दबाव बनाकर कोई बड़ा समझौता कराने की कोशिश करने वाले हैं।
Trump Xi Meeting : दरअसल, अमेरिका को लगता है कि चीन अप्रत्यक्ष रूप से ईरान को आर्थिक और रणनीतिक समर्थन दे रहा है।यही वजह रही कि ट्रंप पहले ही चीन से जुड़े कई संस्थानों और तेल नेटवर्क पर प्रतिबंध लगा चुका है। चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार माना जाता है और अमेरिका का आरोप है कि बीजिंग की आर्थिक मदद से ही तेहरान पर प्रतिबंधों का असर कम हो रहा है। ऐसे में ट्रंप, चीन को यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि उसने ईरान का खुला समर्थन जारी रखा तो अमेरिका कड़ा रुख अपना सकता है। लेकिन ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बातचीत में ईरान युद्ध और संघर्ष विराम, ताइवान मुद्दा, अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट, वैश्विक व्यापार जैसे कई बड़े मुद्दे शामिल रह सकते हैं। ट्रंप अब सीधी टक्कर की जगह कूटनीतिक दबाव की रणनीति पर काम कर रहे हैं। चीन के जरिए ईरान को बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिश इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। इधर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बिना अपनी शर्तें माने पीछे हटने वाला नहीं है। तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी पकड़ और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी कड़ा संदेश दिया है।इससे वैश्विक तेल बाजार में तनाव बढ़ गया है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है।हालांकि, हालात जिस तेजी से बदल रहे हैं, उससे मध्य-पूर्व में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ने की आशंका बनी हुई है । क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार रात को युद्ध खत्म करने के वाशिंगटन के प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया। ईरानी अधिकारियों ने भी पलटवार करते हुए कहा, “ईरान अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए योजनाएं नहीं बनाता। दरअसल ईरान ने अमेरिका द्वारा भेजे गए 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव का जवाब दिया। ईरान के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम करने और सुरक्षा को लेकर जिक्र किया। लेकिन ईरान के जवाब से अमेरिकी राष्ट्रपति खुश नहीं है। किन शर्तों पर फंसा है पेंच डालते हैं एक नजर।
Trump Xi Meeting : अब भले ही अमेरिका और ईरान अपनी शर्तों पर अड़ें हों, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रस्तावित दौरा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि ग्लोबल पावर बैलेंस तय करने वाला अहम मोड़ हो सकता है। चीन लंबे समय से ईरान का करीबी साझेदार रहा है। ऐसे में ट्रंप की बीजिंग यात्रा को केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ईरान-अमेरिका टकराव को कम करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। एक तरफ अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाना चाहता है, तो दूसरी तरफ चीन मध्य-पूर्व में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। ट्रंप का यह चीन दौरा पहले अप्रैल में प्रस्तावित था, लेकिन ईरान युद्ध के कारण इसे टाल दिया गया था। अब जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है, तब यह मुलाकात और भी ज्यादा अहम मानी जा रही है।

