Madhya Pradesh: मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और जैव-विविधता संवर्धन को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य सरकार ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, वन्य प्राणियों की सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से कई ठोस कदम उठाए हैं। मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन भी ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हो गया। जब कान्हा टाइगर रिजर्व में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों का सफल पुनर्स्थापन किया गया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के साथ मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीव आदान-प्रदान का एक नया अध्याय जुड़ रहा है।
Madhya Pradesh: ‘जंगली भैंस पुनर्स्थापन’ अभियान का औपचारिक शुभारंभ
नए वन्य मेहमानों के आगमन से जैव-विविधता में संतुलन मजबूत होगा व वन संपदा और अधिक समृद्ध बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले के सूपखार और टोपला क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ करते हुए काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, असम से लाए गए 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। प्रदेश में ‘जंगली भैंस पुनर्स्थापन’ अभियान का औपचारिक शुभारंभ का उद्देश्य विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी जंगली भैंसों की संख्या को बढ़ाना और जैव-विविधता को सशक्त बनाना है। यह अभियान न केवल वन्यजीव संरक्षण बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जंगली भैंस, जो कभी मध्यप्रदेश के वनों में बड़ी संख्या में पाई जाती थी, अब सीमित क्षेत्रों तक सिमट गई है। ऐसे में इस प्रजाति के संरक्षण और पुनर्वास के लिए राज्य सरकार और वन विभाग ने संयुक्त रूप से यह पहल शुरू की है।
Madhya Pradesh: जंगली भैंस पारिस्थिति की तंत्र का एक अहम हिस्सा
जंगली भैंस पारिस्थितिकी तंत्र का एक अहम हिस्सा है। इनके संरक्षण से घासभूमि, जल स्रोतों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी मजबूती मिलेगी। अभियान के तहत सुरक्षित आवास, निगरानी, प्रजनन प्रबंधन और वैज्ञानिक संरक्षण उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल ‘वन्यजीव संरक्षण और जैव-विविधता सहयोग’ के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। इससे न केवल प्रदेश की पर्यावरणीय समृद्धि बढ़ेगी, बल्कि इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बल मिलेगा।‘जंगली भैंस पुनर्स्थापन’ अभियान, मध्यप्रदेश को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान देने की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश आज टाइगर, चीता और गिद्ध स्टेट के रूप में वन्यजीव समृद्धि का अग्रणी केंद्र बन चुका है। वर्ष 2022 में प्रदेश में चीतों की ऐतिहासिक वापसी हुई।विलुप्त वन्य प्राणियों के पुनर्स्थापन के साथ मध्यप्रदेश देश में वन्यजीव संरक्षण की नई मिसाल प्रस्तुत कर रहा है।

