Trump Iran Ceasefire : ट्रंप ने बढ़ाया सीजफायर, ईरान फिर भी फायर,पाकिस्तान के अनुरोध पर कदम उठाया – ट्रंप
Trump Iran Ceasefire : मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर बढ़ाने का ऐलान कर वैश्विक स्तर पर हलचल तेज कर दी है। हालांकि इस घोषणा के बावजूद हॉर्मुज जलडमरूमध्य में टकराव थमता नजर नहीं आ रहा है। ट्रंप के बयान के बाद उम्मीद थी कि हालात सामान्य होंगे, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम होर्मुज स्टैट में तनाव अब भी चरम पर है। एक ओर अमेरिका की नौसैनिक मौजूदगी बढ़ी है, तो दूसरी तरफ ईरान भी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे क्षेत्र में टकराव का खतरा बना हुआ है। ईरान के साथ एकतरफा सीजफायर बढ़ाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समुद्र में अमेरिकी नाकेबंदी की तारीफ की है। जिसके बाद ईरान ने सीज़फायर की मांग को सिरे से खारिज कर दिया और होर्मुज़ नाकाबंदी तोड़ने की भी धमकी दे डाली। अब भले ही डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम की समय सीमा बढ़ा दी है।लेकिन ये कबतक रहेगा, बड़ा सवाल यही है। जाहिर है सिर्फ सीजफायर की घोषणा से हालात नहीं बदलेंगे। जब तक जमीनी स्तर पर सैन्य गतिविधियां कम नहीं होतीं, तब तक हॉर्मुज में घमासान जारी रहने की संभावना है। उधर यह जलमार्ग दुनिया की तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा संभालता है, ऐसे में किसी भी तरह की हलचल का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है।जिसको लेकर दुनिया के कई देशों में संकट की स्थिति बनी हुई है। अब ट्रंप ने युद्ध विराम बढ़ा दिया है, लेकिन रुख अब भी सख्त है।उधर ईरान अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या ये संघर्ष विराम इसी तरह जारी रहेगा, जैसा चल रहा है. क्या दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रैट पर कोई समाधान निकलेगा ? या हालात इसी तरह शांतिवार्ता की अटकलों के बीच तनावपूर्ण रहेंगे।।।।।।
Trump Iran Ceasefire : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में संघर्ष विराम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां एक ओर सीजफायर को आगे बढ़ाने का एलान किया गया है, वहीं दूसरी तरफ शांति वार्ता की दिशा को लेकर स्पष्टता अभी भी नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने ईरान के साथ जारी अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने की घोषणा की, कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच नए दौर की आमने-सामने बातचीत की तैयारी के लिए मध्यस्थों को और समय दिया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर किया जा रहा है। अब डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने का फैसला भले ही लिया हो, लेकिन ट्रंप के तेवर नरम नहीं पड़ें हैं। ट्रंप ने ईरान की सरकार को कमजोर और बिखरी हुई बताते हुए सख्त रुख बरकरार रखा है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कोई ठोस समझौता सामने नहीं आता, तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ईरान अमेरिका संघर्ष विराम फिलहाल कागजों पर तो कायम है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी अनिश्चित हैं।पाकिस्तान की भूमिका पर उठते सवाल और दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी यह संकेत देती है कि शांति का रास्ता अभी लंबा और मुश्किल है। ट्रंप के फैसले से भले ही फिलहाल दोबारा जंग शुरू होने का खतरा कम हो गया है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच अभी भी गहरे मतभेद हैं। अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी अभी भी जारी है और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा भी फिलहाल स्थगित। इस बीच ट्रंप के फैसले पर ईरान ने कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की तैयारी चल रही है। लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विरोधाभासी बयान और अमेरिकी कार्रवाई के कारण फैसला अटका हुआ है। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को भी ‘अस्वीकार्य’ बताया। जिसको लेकर विशलेषकों की अपनी अपनी राय है।
बयान
Trump Iran Ceasefire : इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बना हुआ है। जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने हाल में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले किए हैं और अमेरिका ने भी एक ईरानी जहाज को रोकने की कार्रवाई की है। स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण और अस्थिर बनी हुई है। लगातार गोलीबारी की खबरें सामने आ रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने तीन मालवाहक जहाजों पर गोलीबारी कर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। यह हमला राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सीजफायर बढ़ाने के ऐलान के बावजूद हुआ, क्योंकि अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी खत्म नहीं की है। ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि सीजफायर को आगे बढ़ाने की पहल बातचीत का रास्ता खुलेगा। लेकिन ईरान के तेवर फिलहाल नरम पड़ते नहीं दिख रहे हैं। क्योंकि अमेरिका की ओर से ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी जारी है और ईरान इसी बात से नाराज। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी नहीं हटाता, तब तक वे किसी भी तरह की शांति वार्ता के लिए मेज पर नहीं आएंगे। यानी सीजफायर होने के बावजूद समुद्र में छिड़ी यह जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इससे पहले भी पाकिस्तान में वार्ता हो चुकी है। जो बिना किसी समझौते के ही खत्म हो गई थी। लेकिन अब यदि तनाव और बढ़ता है, तो न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया की की नजरें कूटनीतिक कोशिशों पर टिकी हैं कि क्या हालात को बढ़ते हुए टकराव से पहले संभाला जा सकेगा।
Trump Iran Ceasefire : लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि होर्मुज में बढ़ते तनाव का सीधा असर दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (बेंट क्रूड) की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने या महंगी होने से न केवल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, बल्कि खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों की ढुलाई भी महंगी हो गई है। यदि यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बंद रहा या यहां हमले जारी रहे, तो वैश्विक मंदी का खतरा और बढ़ जाएगा और आम आदमी के लिए घर चलाना मुश्किल।
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