Vande Mataram Controversy : मुख्यमंत्री ने दिया ‘बेशर्मी’ करार, क्या बढ़ेगी तकरार ? ये पार्षद की बेशर्मी नहीं, बल्कि कांग्रेस का चरित्र – CM
Vande Mataram Controversy : मध्यप्रदेश में ‘वंदे मातरम’ को लेकर सियासी विवाद अब तेज़ राजनीतिक बहस में बदल गया है। इंदौर नगर निगम से शुरू हुआ यह मामला अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिसमें सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं। दरअसल 8 अप्रैल को इंदौर नगर निगम की बैठक में ‘वंदे मातरम’ गाने के दौरान कांग्रेस की पार्षदों फौजिया शेख और रुबीना खान ने इसे गाने से इनकार कर दिया। पार्षदों ने धार्मिक आधार पर इसे न गाने की बात कही, जिससे सदन में हंगामा खड़ा हो गया।इस घटना के बाद मामला नगर निगम से निकलकर सीधे राज्य की राजनीति में पहुंच गया। उधर कांग्रेस पार्षदों द्वारा वंदे मातरम गाने से इनकार करने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे ‘बेशर्मी’ करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी से स्पष्टीकरण की मांग की है।
Vande Mataram Controversy : मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक पार्षद का बयान नहीं, बल्कि कांग्रेस के उस चरित्र को दर्शाता है जो हमेशा से राष्ट्र प्रतीकों के खिलाफ रहा है। हालांकि मामले के बाद ही इंदौर शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी से रुबीना को पार्टी से निष्कासित करने के लिए पत्र लिखा था। लेकिन दो दिन बाद भी कोई एक्शन नहीं हुआ। मामले में प्रदेश कांग्रेस संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने कहा कि शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने एक पत्र भेजा है जिसमें अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की मांग की गई है। आगे वरिष्ठ नेताओं से मामले में चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल अब ‘वंदे मातरम’ ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रवाद बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की बहस को फिर तूल दे दिया है। और सियासी बहस तेज है। इसी मुद्दे पर हम चर्चा करेंगे लेकिन पहले कुछ बयान हैं वो सुन लेते हैं।
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