by: vijay nandan
Iran : ईरान ने दिखाया दोस्ती का दम, भारत के लिए खोला होर्मुज का रास्ता मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक अहम फैसला लेते हुए भारत सहित पांच मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक सप्लाई पर पड़ रहे असर को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
ईरान ने स्पष्ट किया कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस फैसले की पुष्टि की है।
Iran : संयुक्त राष्ट्र की अपील के बाद फैसला
यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज के लंबे समय तक बंद रहने पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इससे तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिसका असर दुनिया भर में खेती और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि कई देशों के जहाज मालिकों ने सुरक्षित मार्ग के लिए संपर्क किया था। इसके बाद मित्र देशों के जहाजों को सीमित अनुमति देने का फैसला लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कुछ जहाज पहले ही इस मार्ग से गुजर चुके हैं और आगे भी यह व्यवस्था जारी रह सकती है।

Iran : दुश्मन देशों पर प्रतिबंध जारी
ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं होगी। अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा स्थिति को युद्ध क्षेत्र माना जा रहा है, इसलिए केवल गैर-विरोधी देशों को ही अनुमति दी जा रही है।
Iran : भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है। ऐसे में होर्मुज मार्ग का खुलना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई में बाधा कम होगी और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव घट सकता है।
Iran : वैश्विक बाजार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल निर्यात का मुख्य रास्ता है। इसके आंशिक रूप से खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार को कुछ राहत जरूर मिलेगी, हालांकि क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है।
ईरान ने यह भी कहा है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को पहले उनके अधिकारियों के साथ समन्वय करना होगा और किसी भी तरह की विरोधी गतिविधि से दूर रहना होगा।
संपादकीय नजरिया
भारत और ईरान के संबंध ऐतिहासिक, रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते आज भी सहयोग की मजबूत नींव प्रदान करते हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, खासकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, यह संबंध और भी अहम हो गए हैं।
ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है, और इस मामले में ईरान एक प्रमुख भागीदार रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग पर ईरान की भूमिका भारत के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। हाल के घटनाक्रम, जिनमें भारत को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित मार्ग की अनुमति दी गई, यह दर्शाते हैं कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना कायम है।
हालांकि, भारत को अपने कूटनीतिक संतुलन को बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि उसके संबंध अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों से भी गहरे हैं। ऐसे में भारत की विदेश नीति “संतुलित और बहुपक्षीय” दृष्टिकोण पर आधारित दिखती है।
कुल मिलाकर, भारत-ईरान संबंध केवल ऊर्जा या व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक कूटनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

