jal ganga sanvardhan : इस्कॉन मंदिर से राज्य स्तरीय अभियान की शुरुआत, विकास कार्यों का भूमि-पूजन और जनभागीदारी पर जोर
by: digital desk
jal ganga sanvardhan : इंदौर, गुड़ी पड़वा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर स्थित इस्कॉन मंदिर से ‘राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तीसरे चरण का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्वलित कर अभियान की शुरुआत की और प्रदेशवासियों को जल संरक्षण के लिए संकल्प दिलाया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही इसे सफल बनाया जा सकता है। प्रदेश के हर नागरिक को जल बचाने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए आगे आना होगा।

अपने संबोधन में डॉ. यादव ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का उद्देश्य प्रदेश में जल संसाधनों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन करना है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आमजन उपस्थित रहे। सभी ने जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने और अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।

jal ganga sanvardhan : शहरों में 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया गया
आपको बता दें कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 3000 से अधिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जा चुका है। गत वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए 86 हजार से अधिक खेत तालाब और 550 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए। भू-जल संवर्धन के लिए एक लाख से अधिक कुओं का पुनर्भरण कार्य भी प्रारंभ किया गया। नदियों की निर्मलता के लिए प्रदेश की 57 प्रमुख नदियों और 194 प्रदूषण जल स्रोतों की पहचान कर उनके शोधन की पहल की गई। लगभग 145 नदियों के उद्गम क्षेत्र में हरित विकास के लिए गंगोत्री हरित योजना भी प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि जन भागीदारी से इस अभियान को सफल बनाया जाएगा।

