BY
Yoganand Shrivastava
Dehradun उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन की व्यवस्था को लेकर बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने एक बड़ा और विवादास्पद निर्णय लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब गैर-सनातनियों को मंदिर में प्रवेश के लिए सनातन धर्म में अपनी आस्था का औपचारिक शपथ पत्र (Affidavit) देना होगा। इस फैसले के केंद्र में बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान का नाम आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।

Dehradun क्या है BKTC का नया नियम और सारा अली खान का जिक्र?
BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की मर्यादा और परंपराओं की रक्षा के लिए गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक की चर्चा बोर्ड बैठक में हुई थी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सारा अली खान जैसी हस्तियां, जो अक्सर केदारनाथ आती रही हैं, दर्शन करना चाहती हैं, तो उन्हें सनातन धर्म में अपनी आस्था व्यक्त करते हुए एक शपथ पत्र देना होगा। समिति के अनुसार, यह फॉर्म मंदिर परिसर में ही उपलब्ध कराया जाएगा ताकि श्रद्धालु मौके पर ही अपनी आस्था प्रमाणित कर सकें।

Dehradun कांग्रेस का तीखा पलटवार: “बेटियों का अपमान बर्दाश्त नहीं”
इस फैसले पर विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल ने इसे “विनाश काले विपरीत बुद्धि” करार देते हुए धामी सरकार और मंदिर समिति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सारा अली खान जैसी श्रद्धालु, जिनका केदारनाथ से गहरा जुड़ाव रहा है, उनकी आस्था पर सवाल उठाना और उनसे प्रमाण मांगना मातृशक्ति का अपमान है। पॉल ने सवाल किया कि क्या भाजपा अपने अन्य मुस्लिम नेताओं के परिवारों से भी इसी तरह का हलफनामा मांगेगी?

Dehradun आस्था और मर्यादा के बीच छिड़ी बहस
जहाँ एक ओर मंदिर समिति इस कदम को धार्मिक शुद्धता और परंपराओं के संरक्षण से जोड़कर देख रही है, वहीं दूसरी ओर इसे व्यक्तिगत आस्था के अधिकार का उल्लंघन बताया जा रहा है। सारा अली खान ने अपनी पहली फिल्म ‘केदारनाथ’ के बाद से कई बार बाबा केदार के दर्शन किए हैं और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रहती हैं। अब नए सीजन की शुरुआत के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नियम जमीन पर कैसे लागू होता है।





