MP News 13 March : दूध उत्पादकों, विक्रेताओं के लिए नई एडवाइजरी, निगरानी की मासिक रिपोर्ट भी की जाएगी तैयार
MP News 13 March : भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने दूध की शुद्धता सुनिश्चित करने और मिलावट रोकने के लिए नई एडवाइजरी जारी की है, जिसके तहत अब दूध बेचने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। जिसके बाद मध्यप्रदेश में अब डेयरी सहकारी समितियों को छोड़कर सभी दूध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार ऐसे सभी दुग्ध उत्पादकों और विक्रेताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू करेगी। इसके साथ ही दूध संग्रह, परिवहन में उपयोग होने वाले उपकरणों और भंडारण व्यवस्था की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

राज्य में ऐसे दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान की जाएगी जो अभी तक पंजीकृत नहीं हैं। इसके अलावा दूध से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की मासिक रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां देश के कुल दूध उत्पादन का करीब 9 प्रतिशत यानी लगभग 213 लाख टन दूध का उत्पादन होता है।
राज्य में सांची दूध प्रमुख डेयरी ब्रांड है और ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह को बढ़ावा देने के लिए 381 नई सहकारी समितियां भी कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में पिछले वर्ष नेशनल डेयरी डव्लपमेंट बोर्ड के साथ अनुबंध भी किया गया था। लेकिन अब दूध और उससे जुड़े खाद्य पदार्थों की शुद्धता की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है। जिस पर सरकार की पूरी नजर रहने वाली है।
MP News 13 March : दुग्ध उत्पादकों को अनिवार्य लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन
- • FSSAI ने दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए पंजीकरण या लाइसेंस अनिवार्य किया, नई एडवाइजरी जारी।
- • वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 652 से 707 ग्राम प्रतिदिन रही।
- • प्रदेश सरकार ने दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना भी शुरू की है।
- • योजना में 25 गायों की यूनिट स्थापित करने पर 10 लाख रु. तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
- • प्रदेश में कुल दूध उत्पादन का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा भैंस के दूध का है।
- • डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को छोड़, दूध उत्पादकों, विक्रेताओं को पंजीकरण या लाइसेंस अनिवार्य।
- • प्राधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश, सभी का पंजीकरण या लाइसेंस हो।
- • अपने क्षेत्रों में दूध कारोबारियों की निगरानी बढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें
- • दूध संग्रह और परिवहन में उपयोग होने वाले उपकरणों तथा भंडारण व्यवस्था की जांच की जाए।
- • बिना लाइसेंस के दूध का कारोबार करने पर कानूनी कार्रवाई, व्यवसाय बंद करने तक की नौबत आ सकती है।
- • आवेदन प्रक्रिया: विक्रेता FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं।
- • दूध से संबंधित गतिविधियों की निगरानी और अनुपालन की हर महीने देगी होगी रिपोर्ट।
- • प्राधिकरण ने कहा- हर महीने 15 और 30 या 31 तारीख तक प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
MP News 13 March : लाइसेंस की अनुमानित फीस
- • बेसिक रजिस्ट्रेशन, ₹100 प्रति वर्ष
- • राज्य लाइसेंस- 2,000 से 5,000 प्रति वर्ष।
- • केंद्रीय लाइसेंस: ₹7,500 प्रति वर्ष।
मिलावट केवल खाद्य पदार्थों में अशुद्धि नहीं, बल्कि मानवता के विरुद्ध एक गंभीर अपराध है। जब मुनाफे की हवस मासूम बच्चों के दूध और आम आदमी की थाली तक ज़हर पहुँचाने लगे, तो यह समाज के नैतिक पतन को दर्शाता है। मिलावटखोरी न केवल लोगों की मेहनत की कमाई लूटती है, बल्कि कैंसर और किडनी जैसी जानलेवा बीमारियों को भी न्योता देती है।
मोहन सरकार का लाइसेंस और अनिवार्य पंजीकरण का फैसला स्वागत योग्य है। शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए केवल कानून काफी नहीं हैं, बल्कि सख्त निगरानी और कठोर दंड की भी आवश्यकता है। एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब हमारी बुनियादी ज़रूरतें शुद्ध दूध और सात्विक भोजन भ्रष्टाचार से मुक्त हों।

