Report: Rupesh kumar dass
Hazaribagh (बरकट्ठा): एशिया के सबसे गर्म जल स्रोतों में शुमार हजारीबाग का प्रसिद्ध ‘सूर्यकुंड धाम’ इन दिनों उपेक्षा का शिकार है। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले 15 दिवसीय राजकीय मेले के समापन के बाद पूरे परिसर में कचरे का अंबार लगा हुआ है। विडंबना यह है कि सरकार को लाखों का राजस्व देने वाले इस आयोजन के बाद स्वच्छता अभियान को पूरी तरह भुला दिया गया है।
राजस्व संग्रहण के बाद स्वच्छता से क्यों मोड़ा मुंह?
Hazaribagh मेले के दौरान लाखों की भीड़ जुटने से स्थानीय व्यापार और सरकारी खजाने को काफी लाभ होता है। हालांकि, आयोजन खत्म होते ही पूरा क्षेत्र प्लास्टिक कचरे, दोने-पत्तल और गंदगी के ढेर में तब्दील हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि मेले की चकाचौंध के बीच सफाई व्यवस्था पर कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। न तो संबंधित विभाग और न ही जनप्रतिनिधि इस गंदगी को साफ कराने में कोई रुचि दिखा रहे हैं, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता धूमिल हो रही है।

प्लास्टिक और शराब की बोतलें मवेशियों के लिए बनी काल
Hazaribagh सूर्यकुंड धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि आसपास के ग्रामीण यहाँ अपने मवेशी चराने भी लाते हैं। वर्तमान में फैले प्लास्टिक कचरे और कांच की बोतलों के कारण पशुओं की जान जोखिम में है। हर साल कचरे के साथ प्लास्टिक खाने से कई मवेशियों की मौत की खबरें सामने आती हैं। इसके अतिरिक्त, स्थल पर यत्र-तत्र बिखरी शराब की खाली बोतलें न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँचा रही हैं, बल्कि राहगीरों के लिए भी चोट का कारण बन रही हैं।
जिम्मेदारी के अभाव में स्थानीय लोगों में बढ़ा आक्रोश
Hazaribagh ग्रामीणों का कहना है कि मेले के दौरान तो प्रशासन काफी सक्रिय रहता है, लेकिन समापन के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी तय न होना चिंता का विषय है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि राजकीय मेले से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा नियमित सफाई और रखरखाव पर खर्च किया जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई अभियान चलाकर क्षेत्र को कचरा मुक्त नहीं किया गया, तो वे विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
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