रिपोर्ट- खिलेश वर्मा
Khairagarh News : खैरागढ़, जब आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा एक साथ साकार होती है, तब उसका स्वरूप किसी महोत्सव से कम नहीं होता। खैरागढ़ के ऐतिहासिक राजा फतेह सिंह मैदान में आयोजित प्रार्थिव शिवलिंग का राजशाही महा रुद्राभिषेक ऐसा ही एक दिव्य आयोजन है, जहाँ हजारों श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना में लीन होकर आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं।

Khairagarh News इस भव्य आयोजन का संचालन श्रीराम गौ सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है, जो बीते पाँच वर्षों से लगातार इस धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन करती आ रही है। यह आयोजन अब अपने छठवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या व आस्था दोनों में वृद्धि देखने को मिलती है। इस वर्ष भी आयोजन में 3,000 से 3,500 श्रद्धालुओं की प्रत्यक्ष सहभागिता का अनुमान है, जबकि परिवारों सहित यह संख्या करीब 5,000 तक पहुँच सकती है।

Khairagarh News आयोजन पंडित श्री सृजन महाराज (रतनपुर, बिलासपुर) के पावन सानिध्य में संपन्न हो रहा है। उनके साथ पंडित गिरीश महाराज के नेतृत्व में विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान से महा रुद्राभिषेक संपन्न कराया जा रहा है। इस पुण्य आयोजन में राज परिवार दुर्गा समिति एवं गोपी नाथ मंदिर समिति, खैरागढ़ का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे आयोजन की गरिमा और भव्यता और भी बढ़ जाती है।
Khairagarh News : प्रार्थिव शिवलिंग और रुद्राभिषेक का आध्यात्मिक महत्व
शिव पुराण के अनुसार, प्रार्थिव शिवलिंग की पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है। मिट्टी से निर्मित यह शिवलिंग सृष्टि के पंचतत्वों का प्रतीक है और मनुष्य को प्रकृति व ब्रह्मांड से जोड़ता है। महा रुद्राभिषेक में दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, पंचामृत सहित 20 प्रकार की अभिषेक सामग्री से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है, जो भक्त के जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

Khairagarh News पंडित श्री सृजन महाराज के अनुसार, सामूहिक महा रुद्राभिषेक का प्रभाव व्यक्तिगत पूजा से कहीं अधिक व्यापक होता है। इससे मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह, भय और अस्थिरता का नाश होता है तथा जीवन में शांति, संतुलन और सुख की अनुभूति होती है। शिव को “भोलेनाथ” कहा गया है—वे भाव के भूखे हैं और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

Khairagarh News : शिव: विनाश नहीं, नवसृजन के देवता
भगवान शिव केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि नवसृजन और चेतना के प्रतीक हैं। वे ध्यान, वैराग्य, करुणा और तपस्या का आदर्श स्वरूप हैं। इस आयोजन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज के तनावपूर्ण जीवन में लोग शिव की शरण में जाकर मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल की तलाश कर रहे हैं।

Khairagarh News महा रुद्राभिषेक में शामिल होने के लिए 1100 रुपये का सहयोग निर्धारित किया गया है, जिसमें पूजा की समस्त सामग्री, फल-फूल और प्रसाद शामिल हैं। यह सहयोग केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना को जीवित रखने का माध्यम भी है।
खैरागढ़ में आयोजित यह राजशाही महा रुद्राभिषेक न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह आस्था, संस्कृति और सामूहिक साधना का उत्सव है, जहाँ हर “ॐ नमः शिवाय” के साथ श्रद्धालु अपने जीवन में शिवत्व को अनुभव कर रहे हैं।

